चंडीगढ़, 20 फरवरी : पंजाब सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ लागू किए जाने के बाद विधायकों, पूर्व विधायकों और मंत्रियों को चिकित्सा सुविधाओं के लिए दोहरे विकल्प मिल गए हैं। जहां एक ओर राज्य के हर नागरिक को इस योजना के तहत कवर किया गया है, वहीं जनप्रतिनिधि चाहें तो पुरानी व्यवस्था के तहत Punjab Legislative Assembly से भी अपने मेडिकल बिल क्लेम कर सकते हैं या फिर नई योजना का लाभ ले सकते हैं। इसका मतलब है कि उन्हें पहले से मिल रही असीमित चिकित्सा प्रतिपूर्ति छोड़ने की कोई बाध्यता नहीं है।
65 लाख परिवारों को 10 लाख रुपये सालाना कवर
मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने करीब एक माह पहले ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ शुरू की थी। इस योजना के तहत राज्य के लगभग 65 लाख परिवारों को प्रति परिवार 10 लाख रुपये सालाना का स्वास्थ्य कवर दिया गया है। योजना में पंजाब का हर निवासी शामिल है।
विधायकों के लिए पहले से असीमित मेडिकल सुविधा
‘पंजाब राज्य विधान मंडल सदस्य (पेंशन और चिकित्सीय सुविधाएं) नियम अधिनियम, 1977’ के तहत विधायकों को पहले भी चिकित्सा सुविधा मिलती रही है। 1 जनवरी 1998 से 22 अप्रैल 2003 तक 250 रुपये प्रतिमाह निश्चित भत्ता दिया जाता था। 20 फरवरी 2004 को सरकार ने विधायकों को खुला (असीमित) मेडिकल भत्ता देने का निर्णय लिया। इस कानून के तहत वर्तमान में प्रत्येक विधायक और उनके चार आश्रित परिवार सदस्य चिकित्सा प्रतिपूर्ति के हकदार हैं और खर्च की कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है।
करोड़ों रुपये के मेडिकल क्लेम
‘आप’ सरकार के पहले तीन वर्षों में विधायकों ने 66.38 लाख रुपये के मेडिकल खर्च का क्लेम किया, जो औसतन 22 लाख रुपये प्रतिवर्ष बनता है। वर्ष 2007-08 से 2018-19 तक औसत वार्षिक खर्च 56.72 लाख रुपये रहा। वर्ष 2012-13 से 2021-22 के बीच औसत 28.77 लाख रुपये प्रतिवर्ष रहा। कैबिनेट मंत्रियों को ‘पंजाब स्टेट लेजिस्लेचर ऑफिसर्स, मिनिस्टर्स एंड मेंबर्स (मेडिकल फैसिलिटीज) रूल्स-1966’ के तहत चिकित्सा प्रतिपूर्ति दी जाती है। विधायकों और मंत्रियों को अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत लाभ मिलता है।
पहले भी बीमा मॉडल पर विचार
कांग्रेस सरकार के दौरान 18 मार्च 2017 को कैबिनेट ने फैसला किया था कि विधायकों और मंत्रियों का मेडिकल खर्च ‘स्वास्थ्य बीमा योजना’ के जरिए किया जाए, ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो। हालांकि अमरिंदर सरकार के कार्यकाल के अंत तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका और पुरानी प्रतिपूर्ति व्यवस्था जारी रही।
सूत्रों के अनुसार ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ विधायकों और पूर्व विधायकों पर भी लागू होगी, लेकिन इस संबंध में अभी तक विधानसभा सचिवालय को सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। योजना लागू होने के बावजूद विधायकों के मेडिकल बिल अब भी विधानसभा सचिवालय को मिल रहे हैं, जिससे दोहरी सुविधा पर सवाल उठने लगे हैं।
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