बठिंडा, 12 जनवरी : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भाजपा पर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के दिल्ली विधानसभा के वीडियो से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे पंजाब में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की एक नीच साजिश करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वीडियो को जानबूझकर एडिट किया गया और इसमें ऐसे शब्द जोड़े गए जो सिख धर्म की घोर बेअदबी हैं। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट से यह साबित हुआ है कि आतिशी ने अपने बयान में कहीं भी “गुरु” शब्द का इस्तेमाल नहीं किया।
आतिशी ने नहीं भाजपा ने किया गुरुओं का अपमान : मान
मुख्यमंत्री ने भाजपा की मंशा को उजागर करते हुए कहा कि पार्टी न केवल झूठ फैला रही है, बल्कि विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही पंजाब में लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांटने का एजेंडा लागू कर रही है। भगवंत सिंह मान ने यह भी कहा कि भाजपा और उसके नेता हमेशा से पंजाब विरोधी मानसिकता से काम करते रहे हैं, खासकर चंडीगढ़, बीबीएमबी, पंजाब यूनिवर्सिटी और अन्य मुद्दों पर।
कपिल मिश्रा पर कार्रवाई की पुष्टि
मुख्यमंत्री ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ पंजाब पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह से सही ठहराया। उन्होंने कहा कि इस झूठी वीडियो क्लिप को विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं देखा गया और इसे जानबूझकर फैला दिया गया था। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पंजाब पुलिस ने कपिल मिश्रा के खिलाफ कानूनी कदम उठाए हैं, और उन्हें अपने कुकर्मों का परिणाम भुगतने पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की इस कार्रवाई से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुईं हैं और यह सिखों की बेअदबी करने जैसा है। उन्होंने कहा कि सिख संगत के लिए यह बिल्कुल भी बर्दाश्त योग्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस मामले में न्याय जरूर मिलेगा और जो लोग इस साजिश में शामिल हैं, उन्हें सजा मिलेगी।
अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा के गठबंधन पर हमला
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा एक ही रास्ते पर चल रहे हैं और यह पार्टियां बार-बार झूठ बोलकर पंजाब की सरकार के खिलाफ जहर फैला रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पंजाब के मुद्दों पर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं, जबकि पहले उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने पर सहमति दी थी।
धार्मिक मुद्दों पर स्पष्टता
धार्मिक मुद्दों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह 15 जनवरी को श्री अकाल तख्त साहिब के सामने सभी तथ्यों के साथ पेश होंगे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि श्री अकाल तख्त साहिब उनके लिए सर्वोच्च सम्मानित स्थान है और वे वहां से आने वाले किसी भी आदेश का पालन पूरी श्रद्धा और सच्ची भावना से करेंगे। मुख्यमंत्री ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के गुम हुए स्वरूपों की जांच के लिए एसआईटी की स्थापना को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि एसआईटी बनाने के पीछे कोई राजनीति नहीं है और यह उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने यह पाप किया है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के अधिकारियों ने अपने निजी हितों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर गलत बयान दिए, जिन्हें सच्चाई सामने आने पर सही किया जाएगा।
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