बैंकाक, 1 अप्रैल : Strait of Hormuz से आने वाली तेल आपूर्ति पर असर पड़ने के बाद एशियाई देशों में कच्चे तेल को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। इस मार्ग का बड़ा हिस्सा प्रभावित होने से वैश्विक सप्लाई चेन दबाव में आ गई है। United States ने वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए रूसी तेल खरीद पर लगी पाबंदियों में अस्थायी ढील दी है। इससे India सहित कई देशों को फायदा हुआ है।
रूस को हो रहा अरबों डॉलर का लाभ
बढ़ती मांग के चलते Russia को भारी आर्थिक लाभ हो रहा है। एशियाई बाजारों में उसकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। China, India और Turkey पहले से ही रूसी कच्चे तेल के प्रमुख आयातक रहे हैं। इन देशों ने पश्चिमी पाबंदियों के बावजूद सस्ते तेल को प्राथमिकता दी। भारत को रोजाना लगभग 5.5 से 6 मिलियन बैरल कच्चे तेल की जरूरत होती है, जिससे उसकी आयात निर्भरता काफी अधिक है।
निर्यात बढ़ाने की सीमित क्षमता
विश्लेषकों के मुताबिक, रूस के लिए तुरंत निर्यात में बड़ा इजाफा करना आसान नहीं है। मार्च में तेल निर्यात लगभग 3.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो फरवरी के 3.2 मिलियन बैरल से अधिक है, लेकिन 2023 के मध्य के 3.9 मिलियन बैरल के स्तर से अभी भी कम है। अमेरिकी पाबंदियों में ढील के बाद भारत को सस्ते रूसी तेल तक अधिक पहुंच मिली है, जिससे उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में राहत मिली है।
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