February 6, 2026

आपको पता है क्यों की बोर्ड पर ABCDE की तरह एक पंक्ति में नहीं होते बटन?

आपको पता है क्यों की बोर्ड पर ABCDE की...

नई दिल्ली, 6 फरवरी : क्या आपने कभी सोचा है कि कीबोर्ड पर अक्षर एक सीधी पंक्ति में क्यों नहीं रखे गए हैं? अधिकांश लोग मानते हैं कि इसका उद्देश्य टाइपिंग की गति को बढ़ाना है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। दरअसल, 1870 के दशक में जब पहले टाइपराइटर का आविष्कार हुआ, तब उसके बटन अक्षरों के क्रम में थे, जैसे कि A, B, C, D, E। उस समय की मशीनें यांत्रिक थीं, और तेजी से टाइप करने पर अक्सर टाइपराइटर जाम हो जाते थे।

टाइपराइटर की समस्या

इस समस्या के कारण टाइपिंग में रुकावट आती थी, जिससे कार्य में देरी होती थी। इसलिए, अक्षरों को इस तरह से व्यवस्थित किया गया कि टाइपिंग की गति को नियंत्रित किया जा सके और जाम की समस्या को कम किया जा सके। इस प्रकार, कीबोर्ड का डिज़ाइन वास्तव में टाइपिंग की गति को धीमा करने के लिए किया गया था, ताकि उपयोगकर्ता बिना किसी रुकावट के टाइप कर सकें।

फिर आया QWERTY फॉर्मुला

इस समस्या के समाधान के लिए QWERTY फॉर्मुला विकसित किया गया, जिसे क्रिस्टोफर लैथम शोल्स ने प्रस्तुत किया। इस फॉर्मुले का मुख्य उद्देश्य कीबोर्ड पर सबसे अधिक उपयोग होने वाले अक्षरों जैसे E, I, T, और A को एक-दूसरे से दूर रखना था। इस व्यवस्था के कारण टाइप करने वाले की उंगलियों को अधिक दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे टाइपिंग की गति में थोड़ी कमी आई, लेकिन इसके साथ ही मशीनों के जाम होने की समस्या भी समाप्त हो गई।

इस कीबोर्ड लेआउट को बाद में QWERTY नाम दिया गया, जो इसके प्रारंभिक अक्षरों से लिया गया है। इस प्रकार, QWERTY लेआउट ने टाइपिंग की प्रक्रिया को अधिक सुगम और प्रभावी बना दिया।

समय के साथ क्यों नहीं बदला गया?

सवाल उठता है कि समय के साथ टेक्नोलॉजी के बेहतर होने पर कीबोर्ड के ले आउट को बदला क्यों नहीं गया। दरअसल ऐसा मसल मेमोरी के चलते किया गया। प्रैक्टिकली कीबोर्ड की टेक्नोलॉजी उन्नत होने के बाद ABCDE वाले फॉर्मेट पर वापिस जाया जा सकता था लेकिन दुनिया भर के लोगों को क्वर्टी (QWERTY) की आदत पड़ चुकी थी। आज भी अगर इसे बदला जाए, तो पूरी दुनिया की टाइपिंग स्पीड जीरो हो जाएगी।