नई दिल्ली, 4 फरवरी : बच्चों में स्मार्टफोन की बढ़ती लत और स्क्रीन टाइम के नकारात्मक प्रभाव का मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में गूंजा। जदयू सांसद संजय कुमार झा ने इंटरनेट मीडिया के हानिकारक कंटेंट और उसके बच्चों की शारीरिक व मानसिक सेहत पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जताई। शून्यकाल के दौरान संजय कुमार झा ने विभिन्न अध्ययनों और रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम चिंता, अवसाद, आंखों की समस्याओं और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल रहा है। उन्होंने इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया।
उम्र आधारित चेतावनी का सुझाव
सांसद झा ने सुझाव दिया कि जिस तरह तंबाकू उत्पादों पर उपयोग को लेकर वैधानिक चेतावनी दी जाती है, उसी तरह स्मार्टफोन की उम्र आधारित उपयोग को लेकर भी चेतावनी अनिवार्य की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को इसके दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।
ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण पेश
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की ताजा मिसाल देते हुए बताया कि वहां 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के इंटरनेट मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का कानून बनाया गया है। यह फैसला एक अध्ययन के बाद लिया गया, जिसमें सामने आया कि 10 से 15 साल आयु वर्ग के 96 प्रतिशत बच्चे इंटरनेट मीडिया का उपयोग कर रहे हैं और वहां उपलब्ध कंटेंट काफी हानिकारक पाया गया।
संजय कुमार झा ने कहा कि भारत में भी बच्चों को डिजिटल लत से बचाने के लिए ठोस नीति और नियमन की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी को इसके गंभीर दुष्परिणामों से सुरक्षित रखा जा सके।
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