चंडीगढ़, 27 अप्रैल : राज्यसभा सचिवालय द्वारा आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को मंजूरी मिलने के बाद पार्टी में चिंता बढ़ गई है। अब पार्टी का पूरा फोकस अपने 94 विधायकों को एकजुट रखने पर केंद्रित हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान ने स्थिति को संभालने के लिए बुधवार सुबह जालंधर में विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक की अगुवाई पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया करेंगे। माना जा रहा है कि इसमें विधायकों को संगठनात्मक एकता बनाए रखने और पार्टी कैडर को टूटने से रोकने के निर्देश दिए जाएंगे।
संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर जोर
पार्टी के संगठनात्मक मामलों को पहले संदीप पाठक द्वारा मजबूत आधार दिया गया था। अब नेतृत्व का फोकस विधायकों और निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाए रखने पर है, ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट को रोका जा सके। मालवा क्षेत्र के एक विधायक के अनुसार, राज्यसभा सांसदों के दल-बदल का असर भले ही कुछ हद तक शांत हो गया हो, लेकिन अंदरूनी स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। खास तौर पर फिरोजपुर, पटियाला और रूपनगर के कुछ विधायकों पर नजर रखी जा रही है।
टिकट वितरण से जुड़े नेताओं पर भी नजर
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 2022 विधानसभा चुनाव में जिन विधायकों को राघव चड्ढा या संदीप पाठक की सिफारिश पर टिकट मिला था, उन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कुछ भरोसेमंद विधायकों को भी इन ‘संदिग्ध’ नेताओं की गतिविधियों और राज्य से बाहर आने-जाने पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में संगठन की एकता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए लगातार बैठकें और निगरानी तंत्र को सक्रिय किया जा रहा है।
यह भी देखें : पंजाब में सबसे भरोसेमंद पार्टी बनेगी कांग्रेस : राजा वड़िंग

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