चंडीगढ़ , 13 अप्रैल : पंजाब सरकार ने डैम निर्माण लागत को लेकर जम्मू-कश्मीर के खिलाफ बड़ा वित्तीय दावा पेश किया है। राज्य ने रंजीत सागर डैम और शाहपुर कंडी डैम परियोजनाओं में अपने हिस्से की राशि के तौर पर कुल लगभग 973 करोड़ रुपये की मांग की है। इस मामले के जल्द समाधान के लिए पंजाब के जल संसाधन विभाग ने जम्मू-कश्मीर अधिकारियों के साथ बैठक की मांग की है।
पंजाब सरकार के अनुसार, 20 जनवरी 1979 को पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच हुए समझौते के तहत सिंचाई हिस्से की कुल लागत का 10 प्रतिशत जम्मू-कश्मीर को देना था। डैम की कुल लागत 5755.54 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें सिंचाई पर 656.13 करोड़ रुपये खर्च हुए। पंजाब ने इस मद में मूल राशि: 65.61 करोड़ रुपये, बकाया पर ब्याज (1 अप्रैल 2002 से 28 फरवरी 2026 तक): 235.41 करोड़ रुपये। इस तरह कुल 301.02 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर भी पंजाब ने 1979 के समझौते का हवाला दिया है। जम्मू-कश्मीर ने 2011 की कीमतों के आधार पर 410.29 करोड़ रुपये का अनुमान दिया था, जो 6% वार्षिक वृद्धि के साथ फरवरी 2026 तक बढ़कर 777.58 करोड़ रुपये हो गया। पंजाब पहले ही 105.16 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इस आधार पर अब जम्मू-कश्मीर पर 672.42 करोड़ रुपये की देनदारी बताई गई है।
पानी और रॉयल्टी का भी उठा मुद्दा
मुख्यमंत्री भगवंत मान इससे पहले राजस्थान से भी पानी की रॉयल्टी के बकाया की मांग उठा चुके हैं। अब डैम लागत का मुद्दा उठाकर पंजाब सरकार ने जल संसाधनों से जुड़े वित्तीय अधिकारों पर सख्त रुख दिखाया है। पंजाब सरकार ने इस पूरे मामले के समाधान के लिए जम्मू-कश्मीर के जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के साथ जल्द बैठक करने की मांग की है, ताकि बकाया राशि का निपटारा किया जा सके।
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