धार (मध्य प्रदेश), 23 जनवरी : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित 11वीं सदी की भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद के विवादित परिसर में शुक्रवार तड़के कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच बसंत पंचमी की पूजा शुरू हो गई। इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने इस स्थल पर पूजा-अर्चना को लेकर दावा किया था। संभावित सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समय-विभाजन का विशेष फार्मूला लागू किया है।
सुप्रीम कोर्ट का समय-विभाजन फार्मूला
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने गुरुवार को आदेश दिया कि बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति होगी, जबकि मुस्लिम समुदाय दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सकेगा। अदालत ने यह फैसला किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए दिया है।
भोजशाला को फूलों और भगवा ध्वजों से सजाया गया
इस ऐतिहासिक स्थल को फूलों और भगवा झंडों से सजाया गया। सूरज निकलने के साथ ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचने लगे। बसंत उत्सव समिति के सदस्यों के साथ श्रद्धालुओं ने देवी सरस्वती, जिन्हें मां वाग्देवी भी कहा जाता है, की प्रतिमा स्थापित की। पूजा की शुरुआत हवन कुंड में आरती कर और प्रसाद चढ़ाकर की गई।
8000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात
धार शहर और जिले में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जिला पुलिस के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स, सीआरपीएफ, एमपी आर्म्ड फोर्स, एसआरपीएफ और महिला पुलिस इकाइयों सहित करीब 8,000 सुरक्षाकर्मी भोजशाला परिसर और आसपास के इलाकों में तैनात किए गए हैं। प्रशासन ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी लगातार निगरानी रख रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी समुदायों से शांति व सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है। भोजशाला में बसंत पंचमी का आयोजन कड़े सुरक्षा पहरे में शांतिपूर्ण ढंग से जारी है।
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