चंडीगढ़, 9 जनवरी : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दूरदर्शी नेतृत्व में पंजाब सरकार राज्य से बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को पूरी तरह समाप्त करने के लिए निरंतर, सशक्त और परिणामोन्मुखी प्रयास कर रही है। यह जानकारी सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने सरकार की बाल-केंद्रित और नीतिगत प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए दी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पंजाब सरकार ने समय पर हस्तक्षेप करते हुए बाल विवाह के 64 मामलों को सफलतापूर्वक रोका है। उन्होंने कहा कि ये कार्रवाइयां बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके भविष्य पर मंडराते खतरों को टालने के लिए मान सरकार की त्वरित व निर्णायक सोच को दर्शाती हैं।
आम जनता से सहयोग की अपील
बाल विवाह उन्मूलन अभियान में जनभागीदारी को अहम बताते हुए मंत्री ने अपील की कि बाल विवाह से जुड़ी किसी भी घटना की सूचना बिना किसी झिझक के नजदीकी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दी जाए, ताकि समय रहते कार्रवाई कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि पंजाब में बाल विवाह रोकथाम के लिए नियुक्त सभी अधिकारियों का विवरण भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल विवाह उन्मूलन पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और आम लोगों को संबंधित अधिकारियों तक आसानी से पहुंच सुनिश्चित हो रही है।
जिला और ब्लॉक स्तर पर 2,076 अधिकारियों की नियुक्ति
राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रशासनिक उपायों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास और बाल विवाह की पूर्ण समाप्ति के उद्देश्य से पूरे पंजाब में जिला एवं ब्लॉक स्तर पर 2,076 बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। ये अधिकारी जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं।
स्कूल प्रिंसिपल और सीडीपीओ भी निभा रहे भूमिका
मंत्री ने यह भी बताया कि सामाजिक सुरक्षा विभाग के अधीन सभी जिलों के बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) और सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के प्रिंसिपलों को भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर सतर्कता और प्रारंभिक हस्तक्षेप की व्यवस्था और अधिक मजबूत हुई है। अंत में डॉ. बलजीत कौर ने दोहराया कि पंजाब सरकार बच्चों के अधिकारों की रक्षा, उनके भविष्य को सुरक्षित व सशक्त बनाने और समयबद्ध तथा परिणामोन्मुखी उपायों के माध्यम से राज्य को बाल विवाह से पूरी तरह मुक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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