चंडीगढ़, 28 फरवरी : पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पादरी अंकुर नरूला और उनकी संस्था चर्च ऑफ साइन एंड वंडर्स की गतिविधियों के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली खंडपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है।
जनहित याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
यह जनहित याचिका जालंधर निवासी तेजस्वी मिन्हास की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता देवकील विशाल गर्ग नरवाना ने अदालत को बताया कि अंकुर नरूला और उनकी पत्नी सोनिया नरूला कथित रूप से गंभीर बीमारियों के चमत्कारी इलाज और ‘अभिषेक तेल’ (एनॉइंटिंग ऑयल) के नाम पर गरीब और भोले-भाले लोगों को गुमराह कर धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि संस्था द्वारा यूट्यूब और फेसबुक जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है।
कानून उल्लंघन का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि यह गतिविधियां Drugs and Magic Remedies Act, 1954 का स्पष्ट उल्लंघन हैं। अदालत ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अंकुर नरूला की कार्यप्रणाली नाइजीरिया के दिवंगत प्रचारक टी.बी. जोशुआ से प्रेरित बताई जाती है।
टी.बी. जोशुआ की संस्था पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कथित रूप से फर्जी चमत्कार दिखाने और लोगों को गुमराह करने के आरोप लगे थे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
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