नई दिल्ली, 27 मार्च: भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग सोना निवेश से ज्यादा परंपराओं और रीति-रिवाजों के लिए खरीदते हैं। लेकिन सोने की बढ़ती कीमतों के बीच अब इससे जुड़ी धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। अक्सर ग्राहकों से 10 ग्राम सोने के नाम पर पैसे लिए जाते हैं, लेकिन क्या वास्तव में उन्हें पूरा 10 ग्राम सोना मिलता है? यह सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
गहने बनाते समय क्यों घटता है सोना?
सोने के गहने जैसे कंगन, चेन या झुमके बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इस दौरान सोने को पिघलाया, काटा और आकार दिया जाता है। इस प्रक्रिया में थोड़ा-बहुत सोना ‘वेस्ट’ (खराब) हो जाता है या भाप के रूप में उड़ जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 ग्राम सोने में लगभग 0.5 से 1 ग्राम तक सोना वेस्ट हो सकता है।
मान लीजिए 24 कैरेट सोने की कीमत 1,41,997 रुपये प्रति 10 ग्राम है, तो इस हिसाब से 1 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 13,000 रुपये बैठती है। वहीं 0.5 ग्राम की कीमत करीब 6,500 रुपये होती है। यानी गहना बनाते समय 6,500 से 13,000 रुपये तक का सोना वेस्ट हो सकता है।
क्या ग्राहक से लिया जाता है पूरा पैसा?
यहीं पर असली सवाल खड़ा होता है। कई स्थानीय ज्वेलर्स ‘वेस्टेज चार्ज’ अलग से नहीं बताते, जिससे शक होता है कि इस नुकसान की भरपाई ग्राहक से ही की जा रही है। कुछ मामलों में ज्वेलर सोने का रेट बाजार से ज्यादा बताकर भी यह राशि वसूल लेते हैं।
कैसे बचें धोखाधड़ी से?
- हमेशा हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें
- गहने का वजन खरीदते समय जरूर जांचें
- बिल में मेकिंग चार्ज और वेस्टेज अलग-अलग लिखवाएं
- बड़े और भरोसेमंद ज्वेलर्स से ही खरीदारी करें
गहने बनाते समय थोड़ा बहुत सोना वेस्ट होना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन पारदर्शिता का अभाव ही धोखाधड़ी की जड़ बनता है। इसलिए जागरूक रहना और सही जानकारी रखना ही आपके पैसे की सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।

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