February 20, 2026

अगर रिहा ही करना था तो किसानों पर जोर-जबर्दस्ती क्यों: उगराहां

अगर रिहा ही करना था तो किसानों पर...

संगरूर, 19 फरवरी : भारतीय किसान यूनियन (एकता) उगराहां के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा है कि यदि पंजाब सरकार को जेल में बंद दो किसानों को रिहा करना ही था तो फिर किसानों पर बल प्रयोग क्यों किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने खुद को ताकतवर दिखाने के लिए जानबूझकर किसानों पर कार्रवाई की। वह गांव जखेपल में सरकार की कार्रवाई के विरोध में एकत्र किसानों को संबोधित कर रहे थे। उगराहां ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, “आप हमें पीट लो, जेलों में बंद कर दो, झूठे केस लगा दो, लेकिन हम गर्दन झुकाकर नहीं बैठेंगे।”

पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया

उन्होंने शगनप्रीत सिंह जिऊंद और बलदेव सिंह चाऊके की रिहाई के मामले पर तंज कसते हुए कहा कि “सौ गंडा भी खाया, छित्तर भी खाए और बंदी भी छोड़ दिए।” उन्होंने कहा कि किसानों ने बठिंडा में केवल धरना देना था और जमानत होने के बाद लौट जाना था, लेकिन उन्हें रोकने के लिए पुलिस गांवों और घरों में घुस गई।

उगराहां के अनुसार पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। एक थानेदार द्वारा एक युवक की टांग तोड़ने और आंसू गैस के गोले से एक किसान का हाथ घायल होने का आरोप भी लगाया गया। उन्होंने कहा कि यह जमीन बचाने की लड़ाई है और अभी खत्म नहीं हुई है। लोगों से डर छोड़ने की अपील करते हुए उन्होंने किसान नेता अजीब सिंह जखेपल को पकड़ने आई पुलिस को खदेड़ने पर ग्रामीणों की सराहना की।

संघर्ष तेज करने का ऐलान

उगराहां ने घोषणा की कि अगले दिन गांवों में “विजयी रैलियां” की जाएंगी और सरकार के खिलाफ अर्थी फूंक प्रदर्शन होंगे। उधर, जिला पुलिस प्रमुख सरताज सिंह चहल ने हिरासत में लिए गए सभी किसानों को रिहा करने की पुष्टि की है।

लोकतांत्रिक संगठनों ने की निंदा

इस बीच, ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट विरोधी जमहूरी फ्रंट’ के कन्वीनरों डॉ. परमिंदर सिंह, प्रो. ए.के. मलेरी, बूटा सिंह महिमूदपुर, यशपाल मोहाली और राज्य कमेटी सदस्य बलबीर लोंगोवाल ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह कदम आम आदमी पार्टी की सरकार के जनविरोधी रवैये को दर्शाता है।

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