नई दिल्ली, 7 मार्च : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच State Bank of India (SBI) की एक नई रिसर्च रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि United States और Iran के बीच जारी संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक मंदी का दबाव, महंगाई में वृद्धि और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई गई है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फिलहाल भारत के घरेलू वित्तीय बाजारों को Reserve Bank of India (RBI) के कदमों से कुछ हद तक सहारा मिला है
RBI के कदमों से बाजार को मिला सहारा
रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई ने सरकारी बॉन्ड (G-Sec) यील्ड को संतुलित रखने और रुपये में अधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया है। केंद्रीय बैंक ने स्पॉट मार्केट में दखल देकर रुपये को 92 के स्तर से नीचे बनाए रखने में सफलता हासिल की है, जिसे मौजूदा अनिश्चितता के दौर में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
SBI रिसर्च के मुताबिक यदि यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत के कई मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतकों पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से चालू खाता घाटा (CAD) और महंगाई दोनों पर असर पड़ सकता है।
भारत पर कई मोर्चों से पड़ सकता है असर
रिपोर्ट के अनुसार इस संघर्ष का असर भारत पर कई तरीकों से पड़ सकता है, जिनमें खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस, कच्चे तेल का आयात और पश्चिम एशियाई देशों के साथ व्यापार शामिल है। हालांकि रूस से कच्चे तेल की खरीद और फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट जैसे कदमों के कारण सप्लाई से जुड़े जोखिम कुछ हद तक कम हो सकते हैं।

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