चंडीगढ़, 10 अक्तूबर : पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने बलात्कार के एक मामले में आरोपी को बरी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि कथित पीड़िता का बयान विश्वसनीय नहीं था और प्राथमिकी दर्ज करने में दो महीने की देरी हुई थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की महिला ने भी जिरह के दौरान कहा कि आरोपी के एक हाथ में पिस्तौल और दूसरे हाथ में मोबाइल था।
उसने उसे पीछे से पकड़ लिया। अदालत ने कहा कि यह पूरी तरह से असंभव है कि एक हाथ में पिस्तौल और दूसरे हाथ में मोबाइल लिए हुए व्यक्ति ने उसे पीछे से पकड़कर उसके साथ यौन संबंध बनाए और उसका वीडियो भी बनाया। उसके गोलमोल जवाबों ने उसकी गवाही पर और संदेह पैदा कर दिया है। यह मामला पंजाब से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रमेश कुमारी की खंडपीठ ने कहा, “महिला की गवाही की गहन जाँच के बाद, हमारी राय है कि अभियोजन पक्ष द्वारा निचली अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अपर्याप्त हैं। अगर आरोपी ने उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया होता, तो वह तुरंत पुलिस से संपर्क करती, अपनी मेडिकल जाँच कराती, घर लौटकर अपने पति को सूचित करती, आरोपी को नौकरी से निकाल देती, उससे संबंध तोड़ लेती और उसे अपने बच्चों को इलाज के लिए ले जाने की अनुमति नहीं देती।”
यह भी देखें : मुख्य न्यायाधीश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाले कंटेंट पर पंजाब में दर्ज हुईं कई एफआईआर

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