नई दिल्ली, 5 अप्रैल : भारतीय वायुसेना (IAF) ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी छलांग की तैयारी शुरू कर दी है। वायुसेना अब एक अत्याधुनिक मीडियम एल्टीट्यूड हैवी लिफ्ट एयरशिप विकसित करने जा रही है, जो लंबी अवधि तक आसमान में रहकर निगरानी कर सकेगा। यह मानवरहित एयरशिप करीब 30,000 फीट की ऊंचाई पर लगातार 10 दिनों तक उड़ान भर सकेगा। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मनों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना होगा, जिससे निगरानी क्षमता में बड़ा सुधार आएगा।
हाइड्रोजन ईंधन से चलेगा एयरशिप
यह एयरशिप पूरी तरह हाइड्रोजन ईंधन पर आधारित होगा, जो इसे अधिक समय तक हवा में बनाए रखने में सक्षम बनाएगा। साथ ही यह पारंपरिक विमानों के मुकाबले अधिक किफायती विकल्प भी साबित हो सकता है। इस परियोजना को रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के ‘मेक-1’ कैटेगरी में रखा गया है। इसका उद्देश्य इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित करना है।
IAF ने भारतीय कंपनियों से 30 अप्रैल तक प्रस्ताव (बिड्स) आमंत्रित किए हैं। कंपनियां विदेशी तकनीकी साझेदारों के साथ सहयोग कर सकती हैं, लेकिन परियोजना में कम से कम 50% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य होगी।
चयन के लिए सख्त मापदंड
कंपनियों का चयन उनकी वित्तीय मजबूती, तकनीकी विशेषज्ञता, इन-हाउस डिजाइन क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर किया जाएगा। अंतिम चरण में एक सक्षम कंपनी को उत्पादन साझेदार चुना जाएगा। फिक्स्ड-विंग विमान या AWACS को लंबे समय तक हवा में बनाए रखना महंगा और सीमित अवधि वाला होता है। ऐसे में यह एयरशिप निगरानी और टोही मिशनों के लिए एक सस्ता, टिकाऊ और प्रभावी विकल्प बन सकता है।
यह परियोजना न केवल भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) को भी बढ़ावा देगी।
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