March 17, 2026

मिडिल ईस्ट तनाव : होरमुज़ जलडमरूमध्य पर भारत ने तैनात किए युद्धपोत

मिडिल ईस्ट तनाव : होरमुज़ जलडमरूमध्य...

नई दिल्ली, 17 मार्च : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के मद्देनज़र भारत ने होरमुज़ जलडमरूमध्य के पास अपनी नौसेना की सक्रियता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार भारतीय नौसेना ने दो टास्क फोर्स तैनात की हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों से भारत आने वाले तेल, गैस और अन्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है।

रास्ता खोलने की तैयारी : ब्रिटेन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने कहा है कि उनका देश सहयोगी देशों के साथ मिलकर होरमुज़ जलमार्ग को फिर से खोलने की योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन इस रास्ते को खुलवाने में मदद करेगा, लेकिन किसी बड़े युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता। इस मुद्दे पर अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों के साथ लगातार बातचीत जारी है।

सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकी जाए : चीन

China ने सभी पक्षों से पश्चिम एशिया में जारी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने की अपील की है। यह प्रतिक्रिया Donald Trump के उस आह्वान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने चीन समेत अन्य देशों से होरमुज़ जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिए खुला रखने में सहयोग करने को कहा था।

Israel की सेना ने दावा किया है कि उसने तेहरान के Mehrabad Airport पर एक विमान को नष्ट कर दिया, जिसका उपयोग Ali Khamenei से जुड़ी उच्चस्तरीय आवाजाही के लिए किया जाता था। यह एयरपोर्ट ईरान के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक है और वर्तमान में घरेलू व क्षेत्रीय उड़ानों के साथ-साथ सैन्य उपयोग के लिए भी इस्तेमाल होता है।

ऑस्ट्रेलिया ने किया इनकार

Australia ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस संकट के बीच होरमुज़ जलमार्ग को खोलने के लिए अपने युद्धपोत नहीं भेजेगा। प्रधानमंत्री Anthony Albanese की कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने कहा कि यह मार्ग भले ही वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हो, लेकिन ऑस्ट्रेलिया इस मिशन में शामिल नहीं होगा। 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से होरमुज़ जलडमरूमध्य कई हफ्तों से प्रभावित है।

यह वही मार्ग है जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है। ऐसे में Donald Trump एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि युद्धपोतों की सुरक्षा में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करवाई जा सके।

वैश्विक असर की आशंका

मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों, खासकर तेल की कीमतों और आपूर्ति पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील बनी हुई है।

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