एसएएस नगर, 21 दिसम्बर : मोहाली की विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए मोहाली के मेयर अमरजीत सिंह उर्फ जीती सिद्धू को 15 साल पुराने हत्या के मामले में बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूत आरोपी की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
यह मामला 19 दिसंबर 2010 का है, जब खरड़ के गांव बलियाली में पारिवारिक रंजिश के चलते रतन सिंह नामक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद मृतक के बेटे हरजिंदर सिंह के बयानों के आधार पर तत्कालीन सरपंच कुलवंत सिंह और दिलावर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
बाद में जोड़ा गया था मेयर का नाम
मामले की जांच के दौरान हरजिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि इस हत्या की साजिश में तत्कालीन विधायक बलबीर सिंह सिद्धू के भाई अमरजीत सिंह उर्फ जीती सिद्धू की भी भूमिका थी। इसके बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया था। पंजाब पुलिस की जांच से असंतुष्ट होकर मृतक के परिवार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट के आदेश पर 12 अक्टूबर 2012 को यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।
सीबीआई की जांच में शुरुआती पुलिस जांच की कई गंभीर खामियां सामने आईं। इनमें अहम गवाहों के बयान दर्ज न करना और हत्या में इस्तेमाल हथियारों की फॉरेंसिक जांच न कराना शामिल था।
फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष मेयर अमरजीत सिंह उर्फ जीती सिद्धू के खिलाफ ठोस और निर्णायक सबूत पेश करने में असफल रहा। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। वहीं, मेयर के समर्थकों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।
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