February 4, 2026

मूरथल कांड: जांच रिपोर्टों पर उठे गंभीर सवाल

मूरथल कांड: जांच रिपोर्टों पर...

चंडीगढ़, 28 जनवरी : हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मूरथल में हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। करीब एक दशक बाद अदालत को बताया गया है कि इस मामले की जांच के दौरान साक्ष्यों को इस तरह पेश किया गया, मानो कुछ हुआ ही न हो। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने अखबारी खबरों के आधार पर इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था।

अदालत में जांच प्रक्रिया पर सवाल

मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष अदालत के मित्र (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने कहा कि उन्होंने स्वयं पहले सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन अब 10 साल बाद सीबीआई को भी शायद कुछ नहीं मिल पाएगा।

उन्होंने आईपीएस अधिकारी ममता सिंह की अगुवाई वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट एकतरफा है और नैतिक जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अंत में कोई पीड़ित या गवाह सामने नहीं आया।

प्रकाश सिंह समिति की रिपोर्ट का हवाला

अनुपम गुप्ता ने उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस रिपोर्ट पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इस रिपोर्ट में जो निष्कर्ष निकाले गए हैं, वे बाद की कुछ जांच रिपोर्टों से मेल नहीं खाते।

दूसरी एसआईटी की रिपोर्ट पर भी सवाल

दूसरे अहम मुद्दे पर बोलते हुए गुप्ता ने आईपीएस अधिकारी अमिताभ सिंह ढिल्लों की अगुवाई वाली एसआईटी की जांच पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि इस समिति ने आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा की थी और सिफारिश की थी कि अधिकांश मामलों को रद्द कर दिया जाना चाहिए। गुप्ता के अनुसार, ये सिफारिशें सरकार द्वारा गठित प्रकाश सिंह समिति की रिपोर्ट से बिल्कुल विपरीत हैं।

अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद

खंडपीठ ने सभी दलीलों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि जांच रिपोर्टों में विरोधाभासों और उठे सवालों पर आगे गंभीर मंथन किया जाएगा।