इस्लामाबाद, 28 फरवरी : पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट से गुजर रही है। हाल ही में जारी एक सरकारी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देशभर में 2.62 करोड़ से अधिक बच्चे अब भी स्कूल से बाहर हैं। यह आंकड़ा शिक्षा क्षेत्र में गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा करता है। संघीय शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण मंत्रालय द्वारा जारी गर्ल्स एजुकेशन स्टैटिस्टिक्स एंड ट्रेंड्स रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार, स्कूल से बाहर बच्चों में 1.34 करोड़ लड़कियां शामिल हैं।
ये बच्चियां वर्तमान में औपचारिक शिक्षा प्रणाली से पूरी तरह वंचित हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि विभिन्न सरकारी पहलों के बावजूद शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है।
शिक्षा बजट में लगातार कटौती
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के लिए बजटीय हिस्सेदारी 13 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत रह गई है। अधिकांश प्रांतों में शिक्षा बजट में कमी देखी गई है। पंजाब और सिंध में विशेष रूप से बजट आवंटन में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि आज़ाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बताई गई है। शिक्षा क्षेत्र की एक बड़ी समस्या यह भी है कि कुल बजट का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों के वेतन पर खर्च हो जाता है।
इससे स्कूलों के रखरखाव, बुनियादी ढांचे के विकास और नए प्रोजेक्ट्स के लिए संसाधन नहीं बच पाते। इसके अलावा, देश के केवल 19 प्रतिशत स्कूलों में ही डिजिटल उपकरण उपलब्ध हैं, जो आधुनिक शिक्षा के लिए बड़ी बाधा है।
युवा आबादी: बोझ या संपत्ति?
संघीय मंत्री खालिद महमूद सिद्दीकी ने कहा कि भविष्य की नीतियां सटीक आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 14 करोड़ युवाओं की आबादी को देखते हुए यह तय करना होगा कि देश उन्हें बोझ मानता है या रणनीतिक संपत्ति। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षा क्षेत्र में तत्काल और ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट आने वाले वर्षों में और गहरा सकता है।

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