नई दिल्ली, 17 जनवरी : मुंबई की राजनीति में एक बार फिर ‘रिज़ॉर्ट राजनीति’ देखने को मिल रही है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों के नतीजे घोषित होते ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को पांच सितारा होटलों में ठहराना शुरू कर दिया है। शिंदे गुट के इस कदम को सत्ता संतुलन और आने वाली राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मुंबई BMC चुनावों में भाजपा–शिवसेना (शिंदे) गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि शिंदे गुट ‘किंगमेकर’ की भूमिका में उभरकर सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, इसके पीछे दो बड़े कारण माने जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि शिंदे गुट अपने पार्षदों को एकजुट रखने और किसी भी तरह की तोड़-फोड़ या दलबदल से बचाने के लिए यह एहतियाती कदम उठा रहा है। अगर पूरा विपक्ष एकजुट होता है, तो उसकी कुल ताकत 106 सीटों तक पहुंच सकती है। ऐसे में बहुमत के लिए विपक्ष को केवल 8 और पार्षदों की जरूरत होगी।
यही स्थिति हॉर्स ट्रेडिंग और दलबदल की आशंकाओं को जन्म दे रही है। यदि विपक्ष महायुति से 8 पार्षद तोड़ने में सफल हो जाता है, तो BMC पर भाजपा के नेतृत्व वाली सत्ता की योजना को झटका लग सकता है।
‘रिज़ॉर्ट रणनीति’ का क्या मतलब?
शिंदे गुट की इस ‘रिज़ॉर्ट रणनीति’ को भाजपा के साथ संभावित सौदेबाजी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (शिंदे) BMC के मेयर पद पर अपना दावा छोड़ने के मूड में नहीं है।
पार्टी के भीतर मेयर पद को अपने पास बनाए रखने का दबाव है। कई पार्षदों का मानना है कि भले ही शिंदे गुट गठबंधन में जूनियर पार्टनर हो, लेकिन मेयर पद को लेकर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इसी वजह से पार्षदों को एकजुट रखने और अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

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