नई दिल्ली, 18 मार्च : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एस एंड पी ग्लोबल एनर्जी के मुताबिक, जहां फरवरी में रोज़ाना औसतन 135 जहाज़ इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं 2 मार्च के बाद यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है।
यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से रोज़ाना करीब 14.1 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 5.4 मिलियन बैरल रिफाइंड उत्पादों की सप्लाई होती है। लेकिन मौजूदा हालात के चलते करीब 850 तेल टैंकर फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
तेल व्यापार पर गहरा असर
मार्च में अब तक मध्य पूर्व की खाड़ी से कच्चे तेल की सप्लाई घटकर औसतन 7.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई है, जो फरवरी के मुकाबले आधे से भी कम है। अनुमान है कि करीब 125 मिलियन बैरल कच्चा तेल इस समय खाड़ी क्षेत्र में फंसा हुआ है और हॉर्मुज़ से गुजरने की अनुमति का इंतजार कर रहा है।
भारत के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि देश का लगभग 90% एलपीजी आयात और करीब 42% कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है। ऐसे में सप्लाई में बाधा का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।
रिफाइनिंग कंपनियों को बड़ा झटका
कच्चे तेल की कमी ने एशियाई रिफाइनिंग कंपनियों के मुनाफे को बुरी तरह प्रभावित किया है। सिंगापुर का बेंचमार्क रिफाइनिंग मार्जिन, जो कुछ समय पहले $40-45 प्रति बैरल था, अब गिरकर $5-$10 प्रति बैरल की नकारात्मक सीमा में पहुंच गया है। इससे कंपनियों को लागत घटाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है
तनाव के चलते समुद्री मालभाड़ा भी तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, भाड़ा दरों में 842% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। अफ्रामैक्स टैंकर का भाड़ा $2.46 से बढ़कर $9.46 प्रति बैरल हो गया है, जबकि सुज़मैक्स और वीएलसीसी जैसे बड़े जहाज़ों के किराए में भी कई गुना उछाल आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही स्थिति में जल्द सुधार हो जाए, लेकिन सामान्य हालात बहाल होने में कई महीने लग सकते हैं। ऐसे में वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।

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