नई दिल्ली, 7 अप्रैल : सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों को निर्देश दिए हैं। यह आदेश ईएएस शर्मा द्वारा 23 मार्च को दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल तय की है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की स्टेटस रिपोर्ट पर भी गौर किया।
ED ने गठित की SIT
ED ने अदालत को बताया कि 12 फरवरी 2026 को RAAG से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस टीम में वरिष्ठ ED अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं। CBI के अनुसार, इस मामले में कुल 7 केसों की सक्रिय जांच जारी है, जिनमें 5 हालिया FIR भी शामिल हैं।
हजारों करोड़ का मामला
कथित अनियमितताओं से नुकसान: 2,223 करोड़ रुपये, कुल दावे की राशि: करीब 73,006 करोड़ रुपये। एजेंसियां सरकारी अधिकारियों की भूमिका और वित्तीय संस्थानों के साथ संभावित मिलीभगत की भी जांच कर रही हैं। सरकार की ओर से तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि जांच को चार हफ्तों में पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
यह मामला बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होने से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
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