चंडीगढ़, 28 जनवरी : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बीच आज यहां सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मुद्दे पर छठे दौर की बैठक हुई। बैठक में बातचीत को सार्थक तरीके से आगे बढ़ाने पर सहमति बनी और अगले चरण में सचिव स्तर की वार्ता शुरू करने का फैसला लिया गया। बैठक में तय किया गया कि पंजाब और हरियाणा के जल संसाधन विभागों के सचिव हर 15 दिन में एक बार एसवाईएल मुद्दे पर चर्चा करेंगे। इस चर्चा की रिपोर्ट दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की राजनीतिक स्तर की बातचीत होगी।
बिना ठोस नतीजे के समाप्त हुई बैठक
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत करीब आधे घंटे चली यह बैठक किसी ठोस नतीजे के बिना समाप्त हो गई। केंद्र सरकार द्वारा मध्यस्थता से पीछे हटने के बाद नए साल में यह दोनों राज्यों की पहली बैठक थी। दोनों मुख्यमंत्रियों ने स्पष्ट किया कि पहले अधिकारी स्तर पर सभी तथ्यों पर चर्चा होगी, उसके बाद मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 8 अप्रैल को होगी।
सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई चर्चा
पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा जब जल विवाद का पृष्ठभूमि विवरण देने लगे तो मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि इन तथ्यों से सभी पहले से ही अवगत हैं। दोनों मुख्यमंत्रियों ने कहा कि इस मुद्दे का समाधान आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ निकाला जाना चाहिए, ताकि दोनों राज्यों का माहौल खराब न हो।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “इस मामले में किसी का हक नहीं मारा जाना चाहिए। हम भाई घनैया जी के वारिस हैं, जो युद्ध के मैदान में दुश्मनों को भी पानी पिलाते थे। हरियाणा हमारा दुश्मन नहीं, बल्कि भाई है।” उन्होंने कहा कि पहले पानी का फैसला हो जाए, उसके बाद नहर निर्माण पर भी विचार किया जाएगा।
नायब सिंह सैनी ने जताई उम्मीद
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी बैठक के माहौल को सकारात्मक बताया और कहा कि अब अधिकारी स्तर की बातचीत के जरिए इस मुद्दे को आगे बढ़ाया जाएगा।बैठक में पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल और हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी भी उपस्थित रहीं।
सतलुज-यमुना लिंक नहर: एक नजर
- एसवाईएल नहर की कुल लंबाई: 214 किलोमीटर
- पंजाब में हिस्सा: 122 किलोमीटर (निर्माण लंबित)
- 2002: सुप्रीम कोर्ट ने नहर निर्माण के आदेश दिए
- 2004: पंजाब सरकार ने 1981 के समझौते को रद्द करने का कानून पारित किया
- 2016: सुप्रीम कोर्ट ने उक्त कानून को रद्द कर दिया
द्विपक्षीय वार्ता का विवरण
- पहला दौर: 18 मई 2020
- दूसरा दौर: 14 अक्टूबर 2022
- तीसरा दौर: 4 जनवरी 2023
- चौथा दौर: 9 जुलाई 2025
- पांचवां दौर: 5 अगस्त 2025

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