पटियाला, 1 फरवरी : पटियाला में आयोजित जिला स्तरीय कार्यकर्ता बैठक के दौरान ज्ञानी हरप्रीत सिंह और शिरोमणि अकाली दल (पुनर-सुरजीत) ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल पर तीखा शब्दी हमला बोला। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल की नींव पंथक संस्थाओं, विशेषकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की रक्षा के लिए रखी गई थी, लेकिन समय के साथ कुछ लोगों ने निजी स्वार्थों के लिए पार्टी की दिशा बदल दी।
सुखबीर बादल पर गंभीर आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि वरिष्ठ और प्रमुख नेताओं को दरकिनार कर पार्टी की कमान सुखबीर सिंह बादल को सौंपी गई, जिन्होंने पंथ-प्रस्त और वफादार कार्यकर्ताओं को बाहर कर दिया। इसके साथ ही रेत माफिया, केबल माफिया और नशा तस्करों जैसे तत्वों को अकाली दल से जोड़ा गया। पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल के बम धमाकों से जुड़े खुलासों पर टिप्पणी करते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि उस दौर के बम धमाके सरकारें बनाने और बचाने की राजनीति का हिस्सा थे और यह सब सरकारी निगरानी में हुआ।
भट्ठल के बयान से मचा सियासी तूफान
गौरतलब है कि एक पॉडकास्ट के दौरान राजिंदर कौर भट्ठल ने दावा किया था कि उन्हें पार्टी की दोबारा सरकार बनवाने के लिए बम धमाके करवाने का बेहद आपत्तिजनक प्रस्ताव मिला था। इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है। इसी मुद्दे को लेकर शिरोमणि अकाली दल (पुनर-सुरजीत) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वर्ष 1996-97 के इन “काले सचों” की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग गठित करने की मांग की है। वहीं पंजाब भाजपा ने कांग्रेस से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है।
पानी और एसवाईएल मुद्दे पर दो टूक
बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा और पूर्व सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि पंजाब के पानी को लूटने की किसी भी कोशिश को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि एसवाईएल मुद्दे पर अकाली दल हमेशा पंजाब के अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा।
एसजीपीसी को बताया सिख कौम का किला
नेताओं ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सिख कौम की शान और अधिकारों की रक्षा का किला है, जिसे राजनीतिक दखलअंदाजी से बचाना बेहद जरूरी है। अंत में कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे अकाली दल की पुनर-सुरजीती, पंथक संस्थाओं की रक्षा और पंजाब के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें।
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