February 4, 2026

हाईकोर्ट ने पंजाब भर में आईसीयू सुविधाओं पर मांगा हलफनामा

हाईकोर्ट ने पंजाब भर में आईसीयू...

चंडीगढ़, 28 जनवरी : मलेरकोटला के जिला अस्पताल में इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) की अनुपस्थिति को “हैरान करने वाला” बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने संबंधित सचिव को पंजाब के सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मलेरकोटला जिला अस्पताल पर अदालत की कड़ी टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली खंडपीठ ने खुली अदालत में याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों का संज्ञान लेते हुए कहा कि मलेरकोटला जैसे जिला अस्पताल में आईसीयू का न होना न केवल आश्चर्यजनक बल्कि झकझोरने वाला है। अदालत ने इस मुद्दे के दायरे को बढ़ाते हुए सभी जिलों के सिविल अस्पतालों में आईसीयू सुविधाओं की स्थिति पर जवाब मांगा।

सीटी स्कैन और एमआरआई की कमी पर चिंता

हाईकोर्ट ने जिला स्तर पर आवश्यक डायग्नोस्टिक ढांचे की कमी पर भी गंभीर चिंता जताई। अदालत ने पंजाब सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि प्रत्येक जिला अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें अनिवार्य क्यों नहीं की जानी चाहिएं, खासकर जब हर जिले की आबादी काफी बड़ी है।

सिर्फ 6 जिलों में एमआरआई सुविधा

राज्य सरकार की ओर से पेश आंकड़ों का हवाला देते हुए अदालत ने नोट किया कि पंजाब के मौजूदा 23 जिलों में से केवल छह जिलों में ही एमआरआई मशीनें उपलब्ध हैं। खंडपीठ ने इसे आपातकालीन और रेफरल मामलों के लिहाज से बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। अदालत ने पहले दाखिल किए गए पालन हलफनामों के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि अगला हलफनामा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव द्वारा ही दायर किया जाना चाहिए, ताकि जवाबदेही तय हो सके।

IPHS मानकों और आउटसोर्सिंग पर सवाल

खंडपीठ ने इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स (IPHS) के उल्लंघन और निजी प्रयोगशालाओं को सेवाएं आउटसोर्स करने के फैसले पर भी सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य की संप्रभु जिम्मेदारी है, जिसमें आधुनिक मशीनों की खरीद भी शामिल है। यह आदेश भीष्म किंगर द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। हाईकोर्ट ने अब पूरे राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की न्यायिक समीक्षा के लिए व्यापक और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

यह भी देखें : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 फरवरी को पंजाब दौरे पर