January 13, 2026

तीन दिवसीय माघी मेला शुरू, रात 12 बजे से होगा पवित्र स्नान

तीन दिवसीय माघी मेला शुरू...

श्री मुक्तसर साहिब, 13 जनवरी : श्री मुक्तसर साहिब में तीन दिवसीय ऐतिहासिक माघी मेले की शुरुआत हो गई है, जो अगले तीन दिनों तक चलेगा। इस अवसर पर आज रात 12 बजे से पवित्र स्नान आरंभ होगा, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।

खिदराना की जंग का ऐतिहासिक महत्व

माघी मेले का गहरा संबंध खिदराना की ऐतिहासिक जंग से है। लगभग 320 वर्ष पहले, वर्ष 1705 ईस्वी में, लोक कल्याण के लिए सर्वंसदानी गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसी स्थान पर ज़ालिम मुगल साम्राज्य के खिलाफ अंतिम और निर्णायक युद्ध लड़ा था। यह युद्ध इतिहास की सबसे असमान लड़ाइयों में से एक माना जाता है।

एक ओर गुरु गोबिंद सिंह जी के साथ मुट्ठी भर सिख योद्धा थे, जबकि दूसरी ओर मुगल साम्राज्य और पहाड़ी राजाओं की विशाल सेना थी। इसके बावजूद गुरु जी की युद्ध कौशल, रणनीति, साहस और वीरता ने ऐसा चमत्कार रच दिया कि “सवा लाख से एक लड़ाऊँ” की कहावत को साकार करते हुए सिखों ने मुगलों को करारी शिकस्त दी।

रेगिस्तानी क्षेत्र में रची गई अद्भुत युद्ध रणनीति

उस समय यह क्षेत्र रेतीला था, चारों ओर ऊँचे-ऊँचे टीले थे और उनके बीच एक ढाब (जलस्रोत) स्थित था। युद्ध की दृष्टि से गुरु गोबिंद सिंह जी को यह स्थान अत्यंत उपयुक्त लगा। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार यह युद्ध 21 वैशाख को लड़ा गया था, जब भीषण गर्मी में पानी की अत्यधिक आवश्यकता होती है। गुरु जी ने ढाब के पास सिखों के डेरे लगवाए और करीर, वन तथा झाड़ियों पर चादरें डाल दीं, जो दूर से तंबुओं जैसी प्रतीत होती थीं। इससे दुश्मन को बड़ी सेना होने का भ्रम हुआ। स्वयं गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक ऊँचे टीले पर मोर्चा संभाला और युद्ध भूमि तैयार की।

माई भागो और 40 मुक्तों की वीर वापसी

जब मुगल सेनाएं पीछा करती हुई वहां पहुँचीं तो उन्होंने चादरों से ढकी झाड़ियों को तंबू समझ लिया और घबरा गईं। उन्हें सूचना तो यह थी कि सामने कुछ भूखे-प्यासे सिख हैं, लेकिन यहाँ सैकड़ों तंबू दिखाई दे रहे थे। इससे मुगल सेना का मनोबल टूट गया और सिखों ने उन पर जोरदार हमला कर दिया। ऊपर टीले से गुरु जी ने तीरों की वर्षा कर दी।

युद्ध के दौरान ही पहले बेदावा देकर जा चुके 40 सिख योद्धा, माई भागो और भाई महा सिंह के नेतृत्व में वापस लौट आए और युद्ध में शामिल होकर वीरगति को प्राप्त हुए। इन्हीं 40 वीरों की शहादत की स्मृति में माघी का यह पावन मेला मनाया जाता है।

यह भी देखें : श्री मुक्तसर साहिब में माघी मेले के लिए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध