नई दिल्ली, 7 अप्रैल : भारत के इतिहास में Mir Jafar को एक ऐसे शासक के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने Siraj ud-Daulah के साथ विश्वासघात किया। लेकिन आज उनके ही वंशज अपनी पहचान और नागरिकता साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के Murshidabad में रहने वाले 89 वर्षीय Syed Aamir Mirza के सामने यह चुनौती खड़ी हो गई है कि उन्हें यह साबित करना पड़ रहा है कि वे भारत के नागरिक हैं।
वोटर लिस्ट से नाम हटने पर विवाद
हाल ही में चुनावों से पहले की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान उनके परिवार के 300 से अधिक सदस्यों के नाम वोटर सूची से हटा दिए गए। इससे उनके राजनीतिक अधिकारों और पहचान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आमिर मिर्ज़ा के पास केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली रॉयल पेंशन का दस्तावेज़ है, जो उनके अनुसार उनकी पहचान और नागरिकता का प्रमाण है। वे कहते हैं कि जन्म से ही उन्हें यह पेंशन मिल रही है, फिर भी नागरिकता पर सवाल उठना बेहद दुखद है।
वोट देना सम्मान की बात
उनके बेटे के अनुसार, आमिर मिर्ज़ा आज भी हर चुनाव में मतदान करने जाते हैं और अक्सर सबसे पहले वोट डालते हैं। उनके लिए मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि सम्मान का प्रतीक है चाहे चुनाव नगरपालिका का हो, विधानसभा का या लोकसभा का। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को परिवार ने अपने सम्मान पर चोट बताया है। यह मामला न केवल एक परिवार, बल्कि नागरिकता और पहचान से जुड़े बड़े सवालों को भी सामने लाता है।
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