January 10, 2026

बढ़ते कोरोना के मामलों से घबराने की जरूरत नहीं, बस सावधानियां रखें

बढ़ते कोरोना के मामलों से घबराने की...

नई दिल्ली, 3 जून : कोविड-19 के मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है, और इस समय वैश्विक स्तर पर कोरोना के चार नए स्वरूपों का खतरा विशेष रूप से एशियाई देशों में बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही चिकित्सकों द्वारा एडवाइजरी जारी की गई है कि लोगों को कोविड से घबराने की जरूरत नहीं है, बस कुछ सावधानियंा जरूर रखें। कोविड-19 वायरस मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है, जिसके परिणामस्वरूप कई व्यक्तियों को संक्रमण के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

भारत में 4 हजार से अधिक मरीज

वर्तमान में भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगभग 4,000 के आसपास पहुंच गई है, और यदि आवश्यक सावधानियों का पालन नहीं किया गया, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। इसी बीच, एक हालिया अध्ययन से यह जानकारी मिली है कि कोरोना संक्रमण के बाद कुछ लोगों को सुनने की क्षमता में कमी का सामना करना पड़ सकता है, जो इस बीमारी के दीर्घकालिक प्रभावों को दर्शाता है।

रिसर्च में क्या कहा गया?

शोध के अनुसार 80 प्रतिशत लोगों में सुनने की क्षमता कम पाई गई है। दिल्ली के रोहिणी स्थित बाबासाहेब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ईएनटी विभाग ने एक शोध किया है। इस अध्ययन में ही पता चला है कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों में सुनने की क्षमता कम हो गई है। इसमें 40 प्रतिशत लोगों में एक कान से सुनने की क्षमता कम पाई गई, जबकि 60 प्रतिशत लोगों में दोनों कानों से सुनने की क्षमता कम होने की पुष्टि हुई। यह रिसर्च वल्र्ड वाइड जर्नल ऑफ मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट में भी प्रकाशित हुआ है।

30 से 60 वर्ष के लोग प्रभावित

रिसर्च से पता चला है कि 30 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में कोरोना का विनाशकारी प्रभाव देखने को मिला है, जिसके कारण उनकी सुनने की क्षमता कम हो गई है, जबकि कोरोना से पहले उन्हें सुनने में कोई समस्या नहीं थी। इसके अलावा 30 वर्ष से कम आयु के लोगों में भी सुनने की समस्या देखी गई है।

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