नई दिल्ली, 1 फरवरी : वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन 1 फरवरी को लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह बजट अप्रैल 2026 से मार्च 2027 के वित्तीय वर्ष के लिए होगा और खास बात यह है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार बजट रविवार के दिन प्रस्तुत किया जाएगा। इस बजट से विकास की गति को बनाए रखने, वित्तीय अनुशासन कायम रखने और ऐसे सुधारों की घोषणा की उम्मीद है, जो अमेरिकी टैरिफ सहित वैश्विक व्यापारिक तनावों से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रख सकें। सरकार का फोकस संतुलित विकास और आर्थिक स्थिरता पर रहने की संभावना है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बजट की चुनौती
वित्त वर्ष 2026-27 का बजट एक जटिल पृष्ठभूमि में पेश हो रहा है। जहां एक ओर घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और महंगाई में पहले की तुलना में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर मौजूद अनिश्चितताएं भविष्य के लिए चुनौतियां खड़ी कर रही हैं।
वित्तीय घाटे पर बाजार की नजर
मौजूदा वित्तीय वर्ष में वित्तीय घाटा, जो सरकारी खर्च और आय के बीच का अंतर दर्शाता है, जीडीपी का लगभग 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026 में घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे रखकर सरकार ने वित्तीय मजबूती का लक्ष्य हासिल किया है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि 2027 के बजट में कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को घटाने के लिए क्या दिशा तय की जाती है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष के लिए 4 प्रतिशत वित्तीय घाटे का लक्ष्य घोषित कर सकती है।
पूंजीगत खर्च पर रहेगा जोर
वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए सरकार का निर्धारित पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) 11.2 लाख करोड़ रुपये है। अनुमान है कि आगामी बजट में भी पूंजीगत खर्च पर जोर बरकरार रहेगा और इसमें मौजूदा स्तर से 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। निजी क्षेत्र के निवेशकों की सतर्कता को देखते हुए सरकार की ओर से यह कदम आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
12 लाख करोड़ रुपये से अधिक कैपेक्स की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के पास पूंजीगत खर्च बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश है और यह 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। चूंकि वेतन संशोधन की घोषणा वित्त वर्ष 2028 में प्रस्तावित है, ऐसे में फिलहाल अन्य विकास कार्यों के लिए सीमित लेकिन प्रभावी संसाधनों का उपयोग किए जाने की संभावना है।
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