नई दिल्ली, 5 जनवरी : दिल्ली में पेयजल को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला खतरा सामने आया है। राजधानी के कई इलाकों में भूजल में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई है, जिससे न केवल गुर्दे और हड्डियों पर बल्कि मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही है और बिना किसी तात्कालिक लक्षण के लाखों लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है, जिससे दिल्ली एक ‘मौन स्वास्थ्य आपातकाल’ की ओर बढ़ रही है।
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में लिए गए 103 भूजल नमूनों में से 13 नमूनों, यानी 12.63 प्रतिशत नमूनों में यूरेनियम का स्तर निर्धारित सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक पाया गया है। इसका मतलब है कि लगभग हर आठ नमूनों में से एक नमूना दूषित है। स्थिति उत्तर दिल्ली, उत्तर-पश्चिम दिल्ली, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के साथ-साथ रोहिणी, बवाना औद्योगिक क्षेत्र और नांगलोई-राजपुरा जैसे इलाकों में सबसे गंभीर बताई जा रही है।
यूरेनियम एक खामोश हत्यारा बनता जा रहा है
यूरेनियम को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि यह शरीर में धीरे-धीरे जमा होता है और शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। एम्स के आंतरिक चिकित्सा विभाग के डॉ. हर्षल आर. सावले के अनुसार, यूरेनियम से होने वाली न्यूरोटॉक्सिसिटी तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाती है। यह सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करता है, जिससे याददाश्त कमजोर होना, सीखने की क्षमता में कमी आना और मनोदशा संबंधी विकारों का खतरा बढ़ जाता है। शरीर में जमा यूरेनियम तंत्रिका संकेतों में बाधा डालता है, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए अधिक जोखिम
पेयजल मानकों के अनुसार, पानी में यूरेनियम की सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर (30 पीबीपी) निर्धारित है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में यह मात्रा 59 पीबीपी तक दर्ज की गई है। यूरेनियम युक्त पानी का असर खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा गंभीर बताया जा रहा है।
इससे एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, नींद में गड़बड़ी और मानसिक थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दिल्ली में रोजाना करीब एक अरब लीटर पानी की खपत होती है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड लगभग 9 अरब लीटर पानी की आपूर्ति करता है। इसमें से 10 से 13 प्रतिशत भूजल होता है।

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