नई दिल्ली, 13 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा झटका लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अमेरिकी कच्चा तेल 8% बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 7% बढ़कर 102.29 डॉलर प्रति बैरल हो गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी का ऐलान किया है। इसका मकसद ईरान के तेल निर्यात को रोकना और रणनीतिक दबाव बनाना बताया जा रहा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना केंद्र
इस कदम का असर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर भी पड़ा है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार होता है। नाकाबंदी से टैंकर आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। तेल कीमतों में उछाल के साथ डॉलर मजबूत हुआ, शेयर बाजारों में गिरावट आई, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और पाउंड जैसी जोखिम आधारित मुद्राएं कमजोर हुईं, अमेरिकी ट्रेजरी फ्यूचर्स में गिरावट देखी गई।
जहां पहले युद्ध के डर से सोने की कीमतें बढ़ रही थीं, वहीं अब निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी है, जिससे सोने के दामों में गिरावट आई है। युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर था, जो तनाव बढ़ने पर 119 डॉलर तक पहुंच गया। हाल ही में यह 95 डॉलर तक गिरा था, लेकिन अब वार्ता विफल होने से फिर तेजी लौट आई है।
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