नई दिल्ली, 4 मार्च : अमेरिका-इज़राइल हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना है। इस फैसले के बाद ईरान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और दुनिया भर में इसकी चर्चा हो रही है।
1969 में मशहद में जन्म, क्रांति के दौर में बीता बचपन
मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में मशहद में हुआ था। उनका बचपन उस दौर में बीता जब उनके पिता तत्कालीन शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के खिलाफ एक प्रमुख धार्मिक नेता के रूप में उभर रहे थे। 1979 की इस्लामी क्रांति ने खामेनेई परिवार की किस्मत बदल दी और उन्हें सत्ता के केंद्र में ला खड़ा किया।
शिक्षा और धार्मिक पृष्ठभूमि
तेहरान आने के बाद मोजतबा ने अलावी हाई स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने क़ोम में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की, जहां वे कट्टरपंथी धर्मगुरुओं के संपर्क में आए।
हालांकि दशकों तक मदरसे में अध्ययन करने के बावजूद वे ‘आयतुल्ला’ का उच्च धार्मिक दर्जा हासिल नहीं कर सके, जो सुप्रीम लीडर पद के लिए परंपरागत रूप से अहम माना जाता है।
मोजतबा खामेनेई ने कभी कोई निर्वाचित या सरकारी पद नहीं संभाला। लेकिन सूत्रों के मुताबिक वे सुप्रीम लीडर के दफ्तर में ‘गेटकीपर’ की भूमिका निभाते रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि उनकी वास्तविक ताकत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ उनके मजबूत संबंधों से आती है, जो ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य और राजनीतिक शक्ति मानी जाती है।
अमेरिकी प्रतिबंध
साल 2019 में अमेरिका ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाए थे। आरोप था कि अली खामेनेई ने अपनी कुछ शक्तियां अपने बेटे को सौंप दी थीं, जिससे वे पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभा रहे थे। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोजतबा के पास बड़ा निवेश नेटवर्क है। दावा किया गया है कि उन्होंने पश्चिमी बाजारों में अरबों डॉलर का निवेश कर एक वैश्विक संपत्ति साम्राज्य खड़ा किया है। हालांकि इन दावों पर आधिकारिक पुष्टि सीमित रही है।
उत्तराधिकार पर उठे सवाल
ईरान के संविधान के मुताबिक सुप्रीम लीडर का धार्मिक कद बेहद ऊंचा होना चाहिए। ऐसे में पिता से पुत्र को सत्ता सौंपे जाने को लेकर बहस छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम ईरान के इस्लामी गणराज्य की उस मूल विचारधारा को चुनौती देता है, जो वंशवाद (Hereditary Rule) का विरोध करती रही है। मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा असर डाल सकती है।

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