नई दिल्ली, 27 मार्च: भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने फिल्म संगीत की दुनिया को नई पहचान दी। सात दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने 30,000 से ज्यादा गीत गाए और अपनी आवाज़ से पीढ़ियों को प्रभावित किया। उनका जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर थे। बचपन में उनका नाम हेमामंगेशकर था।
लता जी ने बहुत कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बना ली थी। उनका परिवार बाद में महाराष्ट्र चला गया, जहां से उनके करियर ने उड़ान भरी। 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
संघर्षों से भरी रही जिंदगी
लता मंगेशकर का जीवन जितना शानदार दिखता है, उतना ही संघर्षों से भरा हुआ था। पिता के निधन के बाद, सबसे बड़ी बेटी होने के कारण उन्होंने कम उम्र में ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली। बचपन में उन्हें गंभीर चेचक हो गई थी, जिससे उनकी जान पर बन आई थी।
इतना ही नहीं, 1963 में उन्हें जहर दिए जाने की भी घटना सामने आई थी, जिसके कारण वे करीब तीन महीने तक बिस्तर पर रहीं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार सफलता हासिल करती रहीं।
क्यों कहा—“लड़की नहीं, लड़का बनना चाहती हूं”?
एक इंटरव्यू में जब पुनर्जन्म को लेकर सवाल किया गया, तो लता जी का दर्द साफ झलक उठा। उन्होंने कहा:
“अगर पुनर्जन्म होता है, तो भगवान मुझे दोबारा जन्म न दे। लेकिन अगर देना ही है, तो भारत में दे, महाराष्ट्र में दे, एक छोटे से घर में दे… लेकिन लड़की नहीं, लड़का बनाकर दे।”
जब मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने उनसे इसका कारण पूछा, तो उन्होंने कहा कि उनके जीवन के दुख और कठिनाइयों को वही समझ सकती हैं। यह बयान इस बात को दर्शाता है कि अपार सफलता, सम्मान और प्रसिद्धि के बावजूद, लता मंगेशकर का निजी जीवन कई दर्द और त्याग से भरा रहा।

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