नई दिल्ली, 9 नवम्बर : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन छात्रों ने शुल्क जमा करने के बाद निर्धारित समय के भीतर अपना प्रवेश रद्द कर दिया है और शुल्क वापसी की मांग की है, उन्हें उनका पैसा वापस मिल जाना चाहिए। दूसरी ओर, उच्च शिक्षण संस्थान इस मामले में कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं। कई संस्थानों ने छात्रों की फीस वापस नहीं की है। ऐसे में आयोग ने संस्थानों से आग्रह किया है कि अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
इसके तहत संस्थानों की मान्यता रद्द करने, वित्तीय सहायता निलंबित करने और प्रवेश पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। यूजीसी के दिशानिर्देशों के अनुसार, संस्थानों को 31 अक्टूबर तक उन छात्रों की फीस वापस करनी होगी जिनका प्रवेश रद्द हो गया है।
यूजीसी ने यह फॉर्मूला घोषित किया है
यूजीसी ने कहा है कि 31 अक्टूबर 2025 तक दाखिला रद्द कराने वाले छात्रों की फीस वापस कर दी जाए। इस बीच, अगर किसी छात्र ने 30 सितंबर तक दाखिला रद्द कराया है, तो उसका पूरा पैसा वापस किया जाए। इस तारीख के बाद और 31 अक्टूबर तक दाखिला रद्द कराने के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को 1,000 रुपये प्रोसेसिंग फीस काटने के बाद बाकी फीस वापस की जाए।
दो हजार छात्रों का 20 करोड़ से अधिक पैसा फंसा
सूत्रों के अनुसार, देश के शिक्षण संस्थानों में लगभग दो हज़ार छात्रों का 20 करोड़ से ज़्यादा पैसा फंसा हुआ है। संस्थान इस पैसे को लौटाने में देरी या टालमटोल कर रहे हैं। यूजीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि इस शैक्षणिक सत्र यानी 2025-26 के साथ-साथ पिछले सत्रों में भी जिन छात्रों की फीस वापस नहीं हुई है, उनकी फीस उच्च शिक्षण संस्थान तुरंत लौटाएँ। अन्यथा, ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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