हाटा, 15 जनवरी : अपने ही सगे द्वारा हत्या की शिकार हुईं 70 वर्षीय रूना और 28 वर्षीय प्रियंका को मौत के बाद भी अपनों के हाथों अंतिम विदाई नसीब नहीं हुई। श्मशान घाट पर दोनों की चिता को आग देने के लिए कोई आगे नहीं आया। करीब एक घंटे से अधिक समय तक इंतज़ार के बाद, आखिरकार श्मशान घाट के एक कर्मचारी ने आगे बढ़कर चिता को अग्नि दी और इंसानियत का धर्म निभाया।
पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे रूना और प्रियंका के शव एंबुलेंस से हेतिमपुर घाट लाए गए। मौके पर छह-सात रिश्तेदार मौजूद थे। सास-बहू के लिए एक ही चिता तैयार की गई। सभी रस्में पूरी होने के बाद जब अंतिम संस्कार का समय आया, तो कोई भी परिजन चिता को आग देने के लिए तैयार नहीं हुआ। धीरे-धीरे रिश्तेदार भी पीछे हटते चले गए। करीब सवा घंटे तक यही स्थिति बनी रही। यह देखकर चिता तैयार करने वाले श्मशान कर्मचारियों में से सुरेश आगे आए और चिता को अग्नि दी।
नशे के विरोध से नाराज़ होकर की थी दोहरी हत्या
बताया गया कि सिकंदर गुप्ता ने नशे का विरोध करने से नाराज़ होकर बीते सोमवार को अपनी बुज़ुर्ग मां और पत्नी की ईंटों से सिर कुचलकर हत्या कर दी थी। जब लोग मौके पर पहुंचे तो दरवाजे पर बैठे सिकंदर की हालत देखकर दंग रह गए। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने उसे काबू में ले लिया। यह घटना न केवल रिश्तों की टूटन, बल्कि समाज में बढ़ती संवेदनहीनता का भी दर्दनाक उदाहरण बन गई—जहां अंतिम संस्कार जैसे पवित्र कर्म के लिए भी अपनों ने हाथ खींच लिए, और एक अजनबी ने इंसानियत निभाई।
श्मशान घाट के कर्मचारी ने निभाया इंसानियत का धर्म**
सास-बहू को अपनों के हाथों अग्नि भी नसीब नहीं

More Stories
बंद होने वाला था ईरान का एयरस्पेस, समय रहते निकल गया इंडिगो का विमान
पहाड़ों पर बर्फ, दिल्ली-यूपी-बिहार में कड़ाके की ठंड— IMD का अपडेट
‘दुश्मनों के लिए चेतावनी’: भारत ने ऑपरेशन सिंदूर का वीडियो जारी किया