नई दिल्ली, 16 जनवरी : महाराष्ट्र की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में भारतीय जनता पार्टी भारी जीत की ओर बढ़ती दिख रही है। ताजा रुझानों के मुताबिक 29 में से 23 सीटों पर भाजपा आगे चल रही है। ऐसे में ठाकरे भाइयों—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—की बहुप्रचारित एकजुटता चुनावी मोर्चे पर असरदार साबित होती नजर नहीं आ रही।
बीएमसी चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम तब देखने को मिला, जब करीब 20 साल बाद चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर आए। इस गठजोड़ का मकसद मराठी वोट बैंक को एकजुट करना और एकनाथ शिंदे से अपनी राजनीतिक विरासत वापस हासिल करना था, जो फिलहाल शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर काबिज हैं।
भाजपा की मजबूत स्थिति, ठाकरे खेमे की मुश्किलें बढ़ीं
हालांकि, चुनावी नतीजों के रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि यह रणनीति अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। भाजपा बीएमसी चुनावों में स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे के लिए यह गठबंधन एक मजबूरी भरा कदम था, खासकर 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और एनसीपी के साथ बने महाविकास अघाड़ी की करारी हार के बाद।
बीएमसी की अहमियत और शिवसेना का आखिरी गढ़
बीएमसी चुनाव इसलिए भी बेहद अहम माने जा रहे थे क्योंकि यह एशिया की सबसे अमीर नगरपालिकाओं में से एक है। शिवसेना का यहां करीब 25 वर्षों तक दबदबा रहा है। ऐसे में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह चुनाव अपने आखिरी मजबूत किले को बचाने जैसा था।
लेकिन मौजूदा रुझानों ने साफ कर दिया है कि ठाकरे भाइयों की एकजुटता भी भाजपा की चुनावी मशीनरी को रोकने में नाकाम रही। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या राज्य स्तर पर बने गठबंधन और बदली हुई राजनीतिक समीकरण उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं।

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