नई दिल्ली, 18 जनवरी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने कड़ा जवाबी कदम उठाया है। भारत ने अमेरिका से आयात होने वाली दालों और फलियों पर 30 फीसदी टैरिफ शुल्क लगा दिया है। यह टैरिफ पिछले वर्ष 30 अक्टूबर से लागू है, हालांकि भारत ने इसे अनावश्यक विवाद से बचने के लिए सार्वजनिक रूप से ज्यादा प्रचारित नहीं किया।
अमेरिकी सांसदों की ट्रंप से गुहार
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के दो प्रभावशाली सीनेटर—नॉर्थ डकोटा के केविन क्रेमर और मोंटाना के स्टीव डेंस—ने राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र लिखकर किसानों के हित में यह टैरिफ हटाने की अपील की है। उनका कहना है कि भारत के इस फैसले से अमेरिकी दाल उत्पादकों को भारी नुकसान हो रहा है, खासकर उन राज्यों के किसानों को जो मटर और अन्य दालों के प्रमुख उत्पादक हैं।
अमेरिकी किसानों को हो रहा भारी नुकसान
सीनेटरों ने पत्र में कहा कि भारत में सबसे ज्यादा खपत होने वाली दालों में मसूर, चना, सूखी फलियां और मटर शामिल हैं। इसके बावजूद इन पर भारी टैरिफ लगाना अमेरिकी किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। उनका आरोप है कि इससे अमेरिकी पीली दालों की भारत में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर हो गई है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल बाजार
अमेरिकी सांसदों ने जोर देते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता बाजार है, जिसकी वैश्विक खपत में लगभग 27 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में अमेरिकी दालों पर ऊंचा टैरिफ लगाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने ट्रंप से मांग की कि किसी भी नए व्यापार समझौते से पहले अमेरिकी दालों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित की जाए।
सीनेटरों ने याद दिलाया कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भी यह मुद्दा उठाया गया था। वर्ष 2020 की व्यापार वार्ताओं के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र भी सौंपा गया था।
2019 से चला आ रहा है विवाद
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में भारत द्वारा अमेरिकी दालहन फसलों को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफरेंसेज (GSP) से हटाए जाने के बाद से यह व्यापारिक विवाद लगातार गहराता चला आ रहा है। मौजूदा टैरिफ फैसले से दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते और अधिक जटिल होने की आशंका जताई जा रही है।
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