वॉशिंगटन, 20 जनवरी : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम बताते हुए एक बार फिर विवाद को हवा दी है। ट्रंप लंबे समय से सार्वजनिक मंचों पर ग्रीनलैंड के नियंत्रण की बात करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने उन यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी आयात टैक्स लगाने का ऐलान किया है, जो अमेरिका के ग्रीनलैंड पर कब्जे के विरोध में खड़े हैं। आर्कटिक क्षेत्र में स्थित ग्रीनलैंड, नाटो सदस्य डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। उत्तरी अटलांटिक, आर्कटिक महासागर और रूस के निकट होने के कारण यह सैन्य और निगरानी क्षमताओं के लिहाज से खास महत्व रखता है।
कानूनी और राजनीतिक बाधाएं
ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए अमेरिकी सेना भेजना सिर्फ सैन्य फैसला नहीं होगा, बल्कि यह एक गंभीर कानूनी और राजनीतिक टकराव को जन्म देगा। डेनमार्क की सहमति के बिना वहां की गई किसी भी सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सीधा हमला माना जाएगा। इस पूरे मामले में नाटो एक बड़ा कारक है। अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो के सदस्य हैं। नाटो संधि के अनुच्छेद-5 के अनुसार, किसी एक सदस्य पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। ऐसे में ग्रीनलैंड में जबरन अमेरिकी सैन्य कार्रवाई अमेरिका को अपने ही सैन्य गठबंधन के खिलाफ खड़ा कर सकती है।
स्थानीय विरोध भी मजबूत
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते मतभेदों का सीधा फायदा चीन और रूस को मिल सकता है।
यूरोपीय संघ परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एकजुटता जताते हुए कहा कि टैरिफ जैसे कदम ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को कमजोर करेंगे।
अमेरिका और यूरोप में असहमति
ग्रीनलैंड के लोगों और वहां की राजनीतिक नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी अमेरिकी कब्जे को स्वीकार नहीं करेंगे। राजधानी नूक में अमेरिकी कांसुलेट के बाहर हुए बड़े प्रदर्शनों से यह स्पष्ट है कि स्थानीय स्तर पर दबाव या सौदे की गुंजाइश बेहद कम है। ग्रीनलैंड मुद्दे पर अमेरिका के रुख का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी आयात टैरिफ लगाने को सैन्य कार्रवाई की बजाय आर्थिक दबाव की रणनीति माना जा रहा है। टैक्स लगाने वाले देशों में नीदरलैंड और फिनलैंड सहित कुल आठ यूरोपीय देश शामिल हैं।
यूरोपीय संघ और नाटो की बढ़ती चिंता
ट्रंप की इस नीति का विरोध अमेरिका के भीतर भी हो रहा है। अमेरिकी सीनेटर मार्क केली ने कहा कि सहयोगी देशों पर टैरिफ लगाने का बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और इससे अमेरिका की वैश्विक साख को नुकसान पहुंचेगा। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इसे रणनीतिक गलती बताया, जबकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाना गलत फैसला है और इसे अमेरिका के सामने मजबूती से उठाया जाएगा। फिलहाल नाटो के टूटने की आशंकाएं कम हैं, लेकिन यह विवाद गठबंधन के भीतर गहराते मतभेदों को जरूर उजागर करता है। यदि अमेरिका अपने सहयोगियों पर लगातार आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाता रहा, तो भविष्य में नाटो की एकता कमजोर पड़ सकती है।
यह भी देखें : ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजरें, रूस के खतरे को लेकर दिया बड़ा बयान

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