नई दिल्ली, 28 जनवरी : भारतीय रेलवे रोज़ाना लाखों यात्रियों को उनकी मंज़िल तक पहुँचाती है, लेकिन कई बार ट्रेन की देरी, तकनीकी खराबी या अन्य कारणों से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे हालात में न सिर्फ़ समय बल्कि पैसे का भी नुकसान होता है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ खास परिस्थितियों में ट्रेन छूटने के बावजूद टिकट का पूरा पैसा वापस मिल सकता है। इसके लिए IRCTC की ओर से TDR (Ticket Deposit Receipt) की सुविधा दी जाती है। आइए जानते हैं कि TDR क्या है और इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
TDR क्या होता है?
अक्सर यात्रियों को लगता है कि अगर ट्रेन छूट गई या चार्ट बन गया तो रिफंड नहीं मिलेगा, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। TDR एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसके ज़रिए यात्री रेलवे को यह जानकारी देता है कि वह यात्रा क्यों नहीं कर सका। अगर कारण रेलवे नियमों के अनुसार सही पाया जाता है—जैसे ट्रेन की ज़्यादा देरी या तकनीकी समस्या—तो यात्री को रिफंड मिल सकता है।
किन परिस्थितियों में मिल सकता है रिफंड?
रेलवे के नियमों के मुताबिक, नीचे दी गई स्थितियों में TDR फाइल किया जा सकता है:
- अगर ट्रेन अपने निर्धारित समय से 3 घंटे से ज़्यादा लेट हो
- ट्रेन की देरी के कारण कनेक्टिंग ट्रेन छूट गई हो
- चार्ट बनने के बाद भी टिकट कन्फर्म न हुआ हो
- AC कोच में एयर कंडीशनर काम न कर रहा हो
- आपकी बुक की गई क्लास बदल दी गई हो (जैसे AC की जगह स्लीपर)
- किसी तकनीकी खराबी के कारण यात्रा शुरू ही न हो पाई हो
रिफंड के लिए TDR कैसे फाइल करें?
आप यह प्रक्रिया घर बैठे मोबाइल या लैपटॉप से आसानी से पूरी कर सकते हैं:
- लॉगिन करें: सबसे पहले IRCTC की वेबसाइट पर अपनी यूज़र आईडी से लॉगिन करें।
- सेक्शन चुनें: ‘My Transactions’ सेक्शन में जाएं और ‘File TDR’ पर क्लिक करें।
- टिकट चुनें: वहां उन टिकटों की लिस्ट दिखाई देगी जिनके लिए TDR फाइल किया जा सकता है। अपना संबंधित PNR नंबर चुनें।
- कारण बताएं: रिफंड का सही कारण चुनें, जैसे – Train Delayed by more than 3 hours।
- सबमिट करें: सारी जानकारी भरने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें।
TDR फाइल करने के बाद आप ‘TDR History’ सेक्शन में जाकर अपने रिफंड का स्टेटस भी चेक कर सकते हैं।

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