February 5, 2026

यौन अपराध मामलों में देरी पर सख्त हुआ गृह मंत्रालय

यौन अपराध मामलों में देरी पर...

चंडीगढ़, 5 फरवरी : महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों खासतौर पर दुष्कर्म और पोक्सो मामलों की जांच में लगातार हो रही देरी को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय एक अहम प्रशासनिक बदलाव की तैयारी कर रहा है। अब पुलिस अधिकारियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट को इन मामलों में समय पर जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को लेकर गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बातचीत भी शुरू कर दी है।

ACR और APAR में दर्ज होगी जांच की स्थिति

पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, गृह मंत्रालय चाहता है कि पुलिस अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) और वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) में यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए कि संबंधित अधिकारी ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराधों की जांच तय समयसीमा के भीतर पूरी की या नहीं। यदि किसी अधिकारी के कार्यकाल में ऐसे मामलों में लगातार देरी पाई जाती है, तो इसका सीधा असर उसकी प्रमोशन, पोस्टिंग और सर्विस रिकॉर्ड पर पड़ेगा।

जल्द जारी हो सकते हैं औपचारिक दिशा-निर्देश

सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय इस प्रस्ताव को जल्द ही औपचारिक दिशा-निर्देशों के रूप में जारी कर सकता है। इसके बाद सभी राज्यों को इसे अपनी पुलिस सेवा नियमावली में लागू करना अनिवार्य होगा। इसे महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने के लिए अब तक का सबसे सख्त प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

फोरेंसिक जांच में देरी बनी बड़ी चुनौती

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय की सबसे बड़ी चिंता फोरेंसिक जांच में हो रही देरी है। कई मामलों में डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते, जिससे पुलिस चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाती। इसी वजह से मंत्रालय यह भी विचार कर रहा है कि केंद्रीय फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (CFSL) और नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) राज्यों को तकनीकी और संसाधन स्तर पर कैसे सहायता दे सकती हैं।

राज्यों को फोरेंसिक क्षमता बढ़ाने के निर्देश

गृह मंत्रालय ने राज्यों से यह भी कहा है कि वे अपने स्तर पर फोरेंसिक लैब की क्षमता बढ़ाएं, स्टाफ की भर्ती करें और डिजिटल सिस्टम को मजबूत बनाएं, ताकि जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

मंत्रालय का मानना है कि भले ही कानून में जांच की समयसीमा तय है, लेकिन जमीनी स्तर पर जवाबदेही की कमी के कारण कई मामलों में जांच महीनों甚至 सालों तक लटक जाती है। इससे पीड़ितों को न्याय मिलने में भारी देरी होती है।

60 दिन में जांच और चार्जशीट का प्रावधान

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत दुष्कर्म और पोक्सो मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा 60 दिन तय की गई है। इसके बावजूद गृह मंत्रालय को मिली रिपोर्टों के अनुसार देश के कई राज्यों में इस समयसीमा का पालन नहीं हो रहा है, जिसे लेकर अब केंद्र सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है।

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