नई दिल्ली, 13 मार्च : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब दुनिया के कई देशों पर दिखाई देने लगा है। इसका सबसे ज्यादा असर पड़ोसी देश पाकिस्तान पर पड़ता दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में जरूरी दवाइयों की भारी कमी होने की आशंका है और फिलहाल देश के पास फार्मास्यूटिकल कच्चे माल का स्टॉक केवल करीब 45 दिनों के लिए ही बचा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है। इससे पाकिस्तान के लिए फार्मास्यूटिकल कच्चे माल, जीवन रक्षक दवाइयों और बेबी फॉर्मूला के आयात में बड़ी रुकावट आ रही है।
मरीजों पर पड़ सकता है गंभीर असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्थिति का आम पाकिस्तानी नागरिकों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। पहले से ही महंगाई और महंगी स्वास्थ्य सेवाओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह संकट और गहरा सकता है। अगर दवाइयों की कीमतें बढ़ती हैं या उनकी उपलब्धता कम होती है, तो कैंसर, डायबिटीज और दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
बच्चों के पोषण पर भी खतरा
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में बेबी फॉर्मूला का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है। यदि वैश्विक सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है तो बच्चों के पोषण पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि पाकिस्तान फार्मास्यूटिकल सामग्री के आयात पर अत्यधिक निर्भर है। कोरोना महामारी के दौरान भी विशेषज्ञों ने कहा था कि देश में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) के स्थानीय उत्पादन की क्षमता बहुत सीमित है।

More Stories
घबराहट में LPG बुकिंग न करें, गैस उत्पादन में 30% बढ़ोतरी
अमेरिकी मेडटेक कंपनी पर साइबर हमला, ईरान से जुड़े हैकर ने डिवाइस किए ठप
मेहनत की मिसाल बनी प्रिया: 1 किलो मशरूम से शुरू किया कारोबार