March 13, 2026

अमेरिकी मेडटेक कंपनी पर साइबर हमला, ईरान से जुड़े हैकर ने डिवाइस किए ठप

अमेरिकी मेडटेक कंपनी पर साइबर...

नई दिल्ली, 13 मार्च : आधुनिक दौर में युद्ध अब केवल मिसाइलों, ड्रोन और हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहा है। साइबर हमले भी अब बड़े हथियार के रूप में उभर रहे हैं। हाल ही में ईरान से जुड़े एक हैकर समूह ने एक प्रमुख अमेरिकी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी पर बड़े साइबर हमले की जिम्मेदारी ली है। बताया जा रहा है कि इस हमले में 2 लाख से अधिक कंप्यूटर, सर्वर और मोबाइल डिवाइस प्रभावित हुए, जिससे कंपनी के कई वैश्विक ऑपरेशन अस्थायी रूप से बाधित हो गए।

रिपोर्ट के अनुसार यह साइबर हमला 11 मार्च को अमेरिकी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी Stryker पर किया गया। कंपनी का मुख्यालय मिशिगन में स्थित है। हमले के कारण कंपनी के हजारों कंप्यूटर सिस्टम प्रभावित हुए और कई सेवाओं को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच सैन्य तनाव बढ़ा हुआ है।

हैकर ग्रुप ने ली हमले की जिम्मेदारी

इस हमले की जिम्मेदारी “Handala Hack” नामक ईरान से जुड़े एक हैकर समूह ने ली है। समूह का दावा है कि यह हमला मीनाब के एक स्कूल पर हुए कथित हमले के जवाब में किया गया। रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी को मीनाब के एक प्राथमिक स्कूल पर टॉमहॉक मिसाइलों से हुए हमले में करीब 180 बच्चों की मौत होने का दावा किया गया था।

हैकर समूह ने दावा किया है कि उसने कंपनी का करीब 51 टेराबाइट डेटा चुरा लिया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2 लाख से ज्यादा सिस्टम, सर्वर और मोबाइल डिवाइस को मिटा दिया गया या गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया गया। समूह ने यह भी दावा किया कि उसने Verifone नामक एक पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनी को भी निशाना बनाया।

‘वाइपर अटैक’ तकनीक का इस्तेमाल

रिपोर्ट के अनुसार यह हैकर समूह अक्सर “Wiper Attack” तकनीक का इस्तेमाल करता है, जिसमें कंप्यूटर और सर्वर से डेटा को पूरी तरह मिटा दिया जाता है।
हैकर्स पहले संवेदनशील जानकारी चुरा लेते हैं और कई बार उसे सार्वजनिक भी कर देते हैं। आमतौर पर वे कर्मचारियों को फर्जी ई-मेल या नकली सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए धोखा देकर सिस्टम में घुसपैठ करते हैं।

हैक्टिविज्म से आगे बढ़ा साइबर नेटवर्क

“हंडाला” नाम एक प्रसिद्ध फिलिस्तीनी कार्टून पात्र से लिया गया है, जिसे विरोध का प्रतीक माना जाता है। यह समूह पहली बार 2023 के अंत में सामने आया था और शुरुआत में इसे फिलिस्तीन समर्थक हैक्टिविस्ट समूह माना गया था। हालांकि अब साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समूह धीरे-धीरे ईरान से जुड़े एक बड़े साइबर नेटवर्क के रूप में विकसित हो चुका है।