चंडीगढ़, 15 मार्च : मानवता और करुणा की भावना को नमन करते हुए PGIMER में 16 साहसी अंगदाता परिवारों को सम्मानित किया गया। इन परिवारों ने अपने निजी दुख के समय भी अंगदान के लिए सहमति देकर एक महान निर्णय लिया। उनके इस फैसले से 80 लोगों का जीवन प्रभावित हुआ, जिनमें 52 गंभीर अंग विफलता से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन मिला और 28 कॉर्नियल अंधत्व से पीड़ित मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आई।
‘समर्थन 2026’ के उद्घाटन सत्र में हुआ सम्मान समारोह
यह सम्मान समारोह CME-cum-Workshop ‘समर्थन 2026’ के उद्घाटन सत्र में आयोजित किया गया। अंगदान और प्रत्यारोपण विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ROTTO नॉर्थ, PGIMER चंडीगढ़ द्वारा किया गया। इसमें क्षेत्र के मेडिकल विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
पूरे ऑडिटोरियम ने खड़े होकर किया दाता परिवारों का सम्मान
इस भावुक अवसर पर पूरा ऑडिटोरियम खड़े होकर तालियों के साथ इन परिवारों के साहस और उदारता को नमन करता नजर आया। उनके निस्वार्थ निर्णय ने निजी दुख को कई मरीजों के लिए जीवन के अनमोल उपहार में बदल दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने दाता परिवारों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में PGIMER की विशेष पहचान इन परिवारों के कारण ही संभव हो सकी है। उन्होंने कहा कि यदि इन परिवारों ने साहस और निस्वार्थ भावना के साथ निर्णय न लिया होता तो यह उपलब्धियां संभव नहीं थीं।
उन्होंने कहा कि जीवन के इस महान उपहार को मापने का कोई पैमाना नहीं हो सकता। यह संतोष की बात है कि इन परिवारों ने दूसरों की जान बचाने की अपनी सबसे बड़ी इच्छा के लिए PGIMER पर भरोसा किया और संस्थान उस भरोसे पर खरा उतरा।
अंगदान की संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी: NOTTO
इस अवसर पर राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO), नई दिल्ली के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि अंगों की उपलब्धता और आवश्यकता के बीच की खाई को भरने का सबसे टिकाऊ तरीका स्वैच्छिक मृतक अंगदान की संस्कृति को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि जब समाज अंगों की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों की पीड़ा को समझेगा और अंगदान का संकल्प लेगा, तो अनेक लोगों की जान बचाई जा सकेगी। उन्होंने जागरूकता बढ़ाने और छात्रों को बदलाव के ‘युवा दूत’ बनाने के लिए NOTTO की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
‘समर्थन 2026’ का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, चंडीगढ़ की वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अमरजीत कौर ने कहा कि ‘समर्थन 2026’ का उद्देश्य अंगदान के बारे में सही जानकारी फैलाना और इस अभियान को और मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि इन साहसी दाता परिवारों की मौजूदगी से अधिक प्रेरणादायक कुछ भी नहीं हो सकता, क्योंकि उनके कठिन समय में लिए गए फैसले हजारों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनते हैं।
इन परिवारों को किया गया सम्मानित
इस अवसर पर जिन परिवारों को सम्मानित किया गया उनमें सुखविंदर सिंह (40 वर्ष, सुनाम), जतिंदर सिंह (36 वर्ष, फतेहगढ़ साहिब), रविंदर सिंह (36 वर्ष, चंडीगढ़), हरप्रीत कौर (17 वर्ष, बस्सी पठाना), नवनीत ठाकुर (23 वर्ष, कांगड़ा), मेजर सिंह (54 वर्ष, राजपुरा-पटियाला), परवीन कुमार (44 वर्ष, पंचकूला), नरेश कुमार (30 वर्ष, कैथल) और रविश कुंवर मलिक (36 वर्ष, जीरकपुर) के परिवार शामिल थे।
इसके अलावा हरपिंदर सिंह (40 वर्ष, आनंदपुर साहिब), गुरनूर सिंह (18 वर्ष, लुधियाना) और दविंदर सिंह (36 वर्ष, रोपड़) के परिवारों को भी सम्मानित किया गया। साथ ही भारतीय सेना से जुड़े अर्शदीप सिंह (18 वर्ष), बलविंदर सिंह (56 वर्ष), प्यार चंद (44 वर्ष) और बिस्वनाथ साव (44 वर्ष) के परिवारों को भी उनके प्रेरणादायक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

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