नई दिल्ली, 18 मार्च : देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कमर्शियल एलपीजी का 10 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा देने का फैसला किया गया है, जिससे छोटे व्यवसायों और रेस्टोरेंट सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है।
हाल ही में हुई अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया गया कि घरेलू एलपीजी और पीएनजी सप्लाई फिलहाल सामान्य बनी हुई है, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए रणनीतिक बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य उन क्षेत्रों में एलपीजी से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की ओर शिफ्ट को बढ़ावा देना है, जहां इसकी सुविधा उपलब्ध है।
PNG की ओर क्यों बढ़ रहा है जोर?
अधिकारियों के अनुसार, घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं। ऐसे में PNG को अधिक सुरक्षित, किफायती और सुविधाजनक विकल्प माना जा रहा है, जिससे सिलेंडर पर निर्भरता कम हो सके।
डिजिटल सिस्टम और सख्ती से निगरानी
सरकार ने यह भी बताया कि अब करीब 90 प्रतिशत एलपीजी बुकिंग ऑनलाइन हो रही है। उपभोक्ताओं को केवल आधिकारिक ऐप और पोर्टल का उपयोग करने की सलाह दी गई है, ताकि गलत जानकारी और धोखाधड़ी से बचा जा सके। कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में देशभर में 2,300 एलपीजी रिटेल आउटलेट्स पर अचानक निरीक्षण किए गए, ताकि गैस की निष्पक्ष वितरण व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय नजरिया
लॉजिस्टिक्स के स्तर पर सरकार लगातार निगरानी कर रही है। फिलहाल एलपीजी सप्लाई सामान्य बनी हुई है और किसी भी बंदरगाह पर भीड़भाड़ की स्थिति नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार सतर्क है। हाल ही में नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बातचीत कर क्षेत्रीय हमलों की निंदा की। साथ ही, ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
सरकार के इन कदमों से उम्मीद है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखते हुए संभावित संकट से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा।

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