नई दिल्ली, 18 मार्च : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय पर संसद की स्थायी समिति की ताज़ा रिपोर्ट में रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR) परियोजनाओं की धीमी प्रगति और बजट उपयोग में कमी पर सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्तमान में लगभग 9.5 दिनों का रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR) उपलब्ध है। इसके अलावा सरकारी तेल कंपनियों के पास कुल मिलाकर लगभग 64.5 दिनों का अतिरिक्त भंडार है। इस प्रकार देश के पास लगभग 74 दिनों की कुल आपूर्ति मौजूद बताई गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देश के पास कम से कम 90 दिनों का भंडार होना चाहिए।
रणनीतिक भंडार परियोजनाओं की धीमी प्रगति
समिति ने बताया कि विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में 53.3 लाख मीट्रिक टन क्षमता के भंडार भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व लिमिटेड (ISPRL) द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा चरण-द्वितीय के तहत ओडिशा के चंडीखोल और कर्नाटक के पादुर में 6.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के दो नए भंडार स्वीकृत किए गए थे, लेकिन लगभग पांच साल बाद भी इन परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन परियोजनाओं के लिए आवंटित बजट का बहुत कम हिस्सा खर्च हो पाया है। कुछ वर्षों में बजट में भारी कटौती की गई, जिससे परियोजनाओं की गति प्रभावित हुई। समिति ने सुझाव दिया है कि बजट अनुमान वास्तविक जरूरतों के आधार पर तैयार किए जाएं और फंड का पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की सिफारिश
समिति ने मंत्रालय को सलाह दी है कि भूमि अधिग्रहण, परियोजना तैयारी और अनुबंध मील के पत्थरों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को तेज किया जाए। साथ ही देश में अनुकूल भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों वाले स्थानों पर अतिरिक्त भूमिगत भंडारण सुविधाएं विकसित करने की संभावना भी तलाशने की बात कही गई है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच महत्व
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए यदि रणनीतिक भंडार परियोजनाओं में तेजी लाई गई होती, तो ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं कम हो सकती थीं। समिति ने इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।

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