March 19, 2026

गैस संकट के बीच केंद्र सख्त, राज्यों को सप्लाई सुधारने के निर्देश

गैस संकट के बीच केंद्र सख्त...

नई दिल्ली, 19 मार्च : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारत में एलपीजी सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके चलते केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) के उपयोग को बढ़ावा देकर संकट को कम करने की कोशिश की जा रही है।

देश में एलपीजी सप्लाई संकट अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60% आयात पश्चिम एशिया से करता है, जिस पर मौजूदा हालात का असर पड़ा है।

PNG को अपनाने की अपील

केंद्र सरकार ने कहा है कि जहां भी PNG सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को एलपीजी के बजाय PNG का उपयोग करना चाहिए। इससे गैस की मांग को संतुलित करने और सप्लाई पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने उन राज्यों के लिए विशेष योजना तैयार की है जो तेजी से अपने PNG नेटवर्क का विस्तार करेंगे। ऐसे राज्यों को वाणिज्यिक एलपीजी में अतिरिक्त 10% आवंटन दिया जाएगा। साथ ही राज्यों को PNG से जुड़ी स्वीकृति प्रक्रियाओं को तेज करने और शुल्क कम करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का दावा—सप्लाई स्थिर

पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि देश में एलपीजी सप्लाई फिलहाल स्थिर है और कहीं भी पूर्ण कमी के संकेत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग 94% तक पहुंच चुकी है और पैनिक बुकिंग में कमी आई है। बुधवार को 5.7 मिलियन से अधिक रिफिल बुकिंग दर्ज की गई, जबकि पिछले दो सप्ताह में लगभग 1.25 लाख नए घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक कनेक्शन जारी किए गए हैं।

हालांकि, कुछ क्षेत्रों से गैस की कमी की शिकायतें भी सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला अस्पताल में एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण वैकल्पिक ईंधन से खाना पकाने की स्थिति की खबर सामने आई है। इस मामले में अधिकारियों के बीच अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे जमीनी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

राज्यों की बढ़ती चिंता

इस बीच सिद्धरमैया ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर बेंगलुरु में वाणिज्यिक और ऑटो एलपीजी की कमी पर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता देने के फैसले के बाद यह समस्या और बढ़ गई है। केंद्र सरकार के सामने फिलहाल घरेलू जरूरतों को पूरा करने और औद्योगिक मांग के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती है, जिसे PNG को बढ़ावा देकर हल करने की कोशिश की जा रही है।