नई दिल्ली, 10 अप्रैल : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामले में पंजाब के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को जमानत देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है। बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि दो महीनों के भीतर ट्रायल शुरू नहीं होता है, तो भुल्लर को दोबारा पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में राहत के लिए जाने की छूट होगी। अदालत ने यह भी माना कि सुनवाई में देरी की स्थिति में आरोपी को कानूनी विकल्प मिलना चाहिए।
भुल्लर ने अपनी याचिका में कहा था कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और 3 जनवरी को चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, इसलिए आगे हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है।उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वह पहले ही काफी समय से जेल में हैं और अधिकतम सजा सात साल है, ऐसे में लंबी प्री-ट्रायल हिरासत अनुचित होगी।
हाई कोर्ट पहले ही कर चुका है खारिज
भुल्लर ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के 16 फरवरी के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए मामले को गंभीर आर्थिक अपराध बताया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण है। एजेंसी ने यह भी आशंका जताई कि रिहा होने पर भुल्लर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या जांच प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं। जानकारी के अनुसार, 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी भुल्लर को 16 अक्टूबर को एक कथित बिचौलिए कृष्णु शारदा के साथ गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई मंडी गोबिंदगढ़ के एक स्क्रैप डीलर की शिकायत के आधार पर की गई थी।
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