लखनऊ, 16 अप्रैल : लोकसभा में महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक गुरुवार को प्रस्तुत किए गए, जिनमें 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रावधान है। इस मुद्दे पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधेयकों का कड़ा विरोध किया।
उन्होंने कहा कि वे महिला आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन सरकार की जल्दबाजी चिंता का विषय है। उनका मानना है कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है, ताकि सभी वर्गों की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने सरकार से पहले जनगणना कराने की मांग भी की।
संसद की भूमिका पर सवाल
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने आरक्षण व्यवस्था में मुस्लिम महिलाओं को शामिल करने की मांग उठाई। इस पर अखिलेश यादव ने सवाल किया कि क्या मुस्लिम महिलाएं देश की आधी आबादी का हिस्सा नहीं हैं। धर्मेंद्र यादव ने संसद की भूमिका पर भी चिंता जताते हुए कहा कि संसद को संविधान की रक्षा का अधिकार है, लेकिन मौजूदा स्थिति में उसे कमजोर करने की कोशिश हो रही है। सपा ने इन विधेयकों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि महिला बिल के नाम पर देशभर में कश्मीर और असम जैसे हालात पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
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