नई दिल्ली, 25 अप्रैल : BRICS देशों के उप-विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों ने पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई है। नई दिल्ली में हुई अहम बैठक में सदस्य देशों ने क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए मानवीय सहायता, अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन और राजनीतिक संवाद को जरूरी बताया। शुक्रवार को हुई इस बैठक में गाजा पट्टी संकट, फिलिस्तीन मुद्दे और मध्य पूर्व व उत्तरी अफ्रीका (MENA) के हालात पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के अंत में जारी “चेयर स्टेटमेंट” में गाजा में तत्काल मानवीय सहायता पहुंचाने पर जोर दिया गया।
UN एजेंसियों की भूमिका को बताया अहम
प्रतिनिधियों ने UNRWA की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जरूरतमंदों तक राहत सामग्री की पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही, UNIFIL जैसे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों पर हमलों को अस्वीकार्य करार दिया गया। BRICS देशों ने आतंकवाद और अतिवाद के खिलाफ अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति को दोहराया और क्षेत्र में हिंसा रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई।
28 फरवरी से शुरू हुए ताजा टकराव के बाद ईरान भारत पर लगातार दबाव बना रहा है कि वह BRICS की अध्यक्षता के दौरान इस मंच को पश्चिमी देशों के प्रभाव के खिलाफ एक कूटनीतिक संतुलन के रूप में इस्तेमाल करे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और राष्ट्रपति मसू़द पेज़ेशकियन ने भारत से अमेरिका और इज़राइल के सैन्य कदमों की आलोचना करने की मांग भी उठाई है।
बहुध्रुवीय विश्व की वकालत, लेकिन मतभेद बरकरार
हालांकि BRICS देश एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं, लेकिन सदस्य देशों के अलग-अलग हितों के चलते किसी ठोस साझा निष्कर्ष तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है। भारत के सामने यह स्थिति काफी संवेदनशील है, जहां उसे अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए “ग्लोबल साउथ” की आवाज के रूप में उभरना है। BRICS देशों ने तय किया है कि अगली बैठक 2027 में चीन की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी।
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