April 28, 2026

बाढ़ सुरक्षा मजबूत करने के लिए एम्फीबियस मशीनों की खरीद को मंजूरी

बाढ़ सुरक्षा मजबूत करने के लिए...

चंडीगढ़, 27 अप्रैल: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बाढ़ सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा करते हुए राज्य में बाढ़ रोकथाम और राहत ढांचे को मजबूत बनाने के लिए उन्नत एम्फीबियस मशीनों (पानी और जमीन दोनों पर चलने वाली मशीनें) की खरीद को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि सरकार मानसून सीजन से पहले संभावित बाढ़ और भारी बारिश से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नहरों और ड्रेनों की सफाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इन आधुनिक मशीनों को खरीदा जाएगा। ये मशीनें बहते पानी में भी काम करने और गहराई तक गाद निकालने में सक्षम हैं, जिससे बाढ़ रोकथाम और आपातकालीन हालात से निपटना आसान होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय की जरूरत है कि राज्य के पास ऐसी बहु-उद्देशीय मशीनें उपलब्ध हों, जो संभावित बाढ़ की स्थिति में तुरंत राहत कार्यों में उपयोग की जा सकें। उन्होंने संबंधित विभाग को इनकी खरीद के लिए विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बाढ़ से जान-माल और फसलों की सुरक्षा

उन्होंने अपने हालिया फिनलैंड दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वहां इन मशीनों का प्रभावी उपयोग देखा गया है। पंजाब में भी इनका उपयोग नहरों, नालों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों की सफाई व रखरखाव के लिए किया जाएगा, जिससे लोगों को बाढ़ से होने वाली परेशानियों में कमी आएगी।

पानी प्रबंधन पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि भाखड़ा डैम का अधिकतम जल स्तर 1680 फीट है, जबकि 26 अप्रैल को यह 1594 फीट दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि 1 जून से शुरू होने वाली धान की बुवाई को ध्यान में रखते हुए मानसून से पहले जल प्रबंधन की बेहतर योजना बनानी जरूरी है। उन्होंने बताया कि राज्य में नए खालों का निर्माण और पुराने खालों की मरम्मत का काम 31 मई तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सिंचाई के लिए अतिरिक्त 5000 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होगी।

मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के कार्यों पर संतोष जताते हुए कहा कि पूरे राज्य में बाढ़ रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर काम चल रहा है। ड्रेनों की सफाई युद्ध स्तर पर जारी है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहले ही गाद निकालने का काम पूरा किया जा चुका है, ताकि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।